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DU के FYUP छात्रों की बढ़ीं मुश्किलें, 8.5 CGPA के बावजूद नहीं मिल रहा 1 वर्षीय PG कोर्स में एडमिशन

Published: Thu, 27 Aug 2026 07:16 PM (IST)

डीयू के चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के पहले बैच के छात्रों को एक वर्षीय पीजी में दाखिले में परेशानी हो रही है, भले ही उनके सीजीपीए 8.5 से अधिक हों।

Delhi university
Delhi university

लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। डीयू में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम (एफवाईयूपी) के पहले बैच के छात्रों के लिए एक वर्षीय पीजी में दाखिला की राह मुश्किल हो गई है। 35,943 छात्रों के इस बैच में कई विद्यार्थी साढ़े आठ से अधिक सीजीपीए हासिल करने के बावजूद एक वर्षीय पीजी में दाखिला नहीं ले पा रहे हैं।

छात्रों का कहना है कि आनर्स विद रिसर्च और आनर्स छात्रों को प्राथमिकता दिए जाने से स्नातक प्रोग्राम कोर्स में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी मेरिट में पीछे हो गए हैं। इससे यह कोर्स करने वाले छात्रों में हताशा और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है।

विश्वविद्यालय ने एक वर्षीय पीजी के लिए कुल 5857 सीटें उपलब्ध कराई हैं। छात्रों का कहना है कि एफवाईयूपी के पहले बैच की तुलना में ये सीटें पर्याप्त नहीं हैं। उनका कहना है कि शुरुआत में करीब 1100 सीटों की जानकारी दी गई थी, जिसके बाद छात्रों के विरोध के बीच सीटों की संख्या बढ़ाई गई। हालांकि, छात्रों की समस्या अभी खत्म नहीं हुई है।

छात्रों के मुताबिक दाखिले में वरीयता-1 में आनर्स विषयों के विद्यार्थियों को रखा गया है, जबकि वरीयता -2 में प्रोग्राम कोर्स के विद्यार्थी हैं। उनका आरोप है कि इस व्यवस्था के कारण अधिक सीजीपीए वाले प्रोग्राम छात्र भी दाखिले से वंचित हो रहे हैं।

छात्रों ने मांग की है कि कटआफ पूरा करने वाले प्रोग्राम कोर्स के विद्यार्थियों को आनर्स छात्रों के समान अवसर दिया जाए। अपने कालेज में एक वर्षीय पीजी सीट की व्यवस्था की जाए और सीटों की संख्या बढ़ाई जाए।

छात्रों ने कहा कि जल्द उनकी मांग नहीं पूरी हुई तो वे आंदोलन शुरू करेंगे। इस मामले को लेकर प्रवेश डीन हनीत गांधी से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

साढ़े आठ से अधिक सीजीपीए लाने के बाद भी और केवल प्रोग्राम कोर्स में होने के कारण मुझे प्राथमिकता नहीं मिल रही। इससे लगता है कि मेहनत करने के बावजूद हमें बराबर अवसर नहीं दिया जा रहा।

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- तनुष्का चौधरी

एफवाईयूपी में एक वर्षीय पीजी को आगे की पढ़ाई का विकल्प बताया गया था। अब जब पहला बैच इस स्तर पर पहुंचा है तो पर्याप्त सीटें नहीं हैं। हम अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं।

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- रोहित सिंह कुंटल

अधिक सीजीपीए वाले कई प्रोग्राम छात्र दाखिले से बाहर हैं। अगर मेरिट का आधार अंक हैं तो प्राथमिकता के नाम पर हमें पीछे क्यों किया जा रहा है?

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- प्रियांशु पांडे

हमें दाखिले के नियम, सीट मैट्रिक्स और प्राथमिकता व्यवस्था की स्पष्ट जानकारी पहले मिलनी चाहिए थी। अंतिम समय में स्थिति स्पष्ट होने से आगे की पढ़ाई की योजना बनाना मुश्किल हो गया।

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- अंशिका मिश्रा

विश्वविद्यालय को कम से कम पहले बैच के छात्रों के लिए पर्याप्त सीटों की व्यवस्था करनी चाहिए। हम फीस या नया आर्थिक बोझ नहीं मांग रहे, सिर्फ पढ़ाई जारी रखने का समान अवसर चाहते हैं।

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- आदित्य कुमार

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