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DMP 2047: बदलने वाली है दिल्ली की तस्वीर, पार्किंग से लेकर ट्रैफिक और झुग्गियों के पुनर्विकास पर मंथन

Published: Sat, 19 Sep 2026 06:00 AM (IST)

डीडीए ने दिल्ली मास्टर प्लान-2047 के क्रियान्वयन पर वास्तुकारों और विशेषज्ञों से चर्चा की। बैठकों में पार्किंग, यातायात, झुग्गी पुनर्विकास ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. डीडीए ने मास्टर प्लान 2047 पर विशेषज्ञों से सुझाव लिए।

  2. पार्किंग, यातायात, झुग्गी पुनर्विकास और पुराने इलाकों पर मंथन।

  3. जमीन एकत्रीकरण, सार्वजनिक परिवहन आधारित विकास पर विशेष जोर।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली के मास्टर प्लान-2047 को लागू करने की दिशा में डीडीए ने वास्तुकारों, नगर नियोजकों और अन्य विशेषज्ञों के साथ छठे और सातवें दौर की चर्चा की।

बैठक में राजधानी में बढ़ती पार्किंग और यातायात की समस्या, पुराने इलाकों के पुनर्विकास, जमीन के बेहतर इस्तेमाल और झुग्गी बस्तियों के उसी स्थान पर पुनर्विकास से जुड़े प्रविधानों पर सुझाव लिए गए। डीडीए ने विशेषज्ञों को मास्टर प्लान में प्रस्तावित विकास नीतियों और उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया की जानकारी दी।

बैठक में सार्वजनिक परिवहन आधारित विकास, जमीन को एकत्र कर नियोजित विकास, अधिक घनत्व वाले गलियारे और कम घनत्व वाले क्षेत्र से जुड़े प्रविधानों को विस्तार से समझाया गया।

जमीन एकत्रीकरण नीति के तहत अलग-अलग मालिकों की जमीन को एक साथ लेकर नियोजित विकास करने की व्यवस्था पर चर्चा हुई। डीडीए ने बताया कि इस प्रक्रिया में नई सड़कों और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाओं का नेटवर्क विकसित किया जाएगा।

सार्वजनिक परिवहन आधारित विकास के तहत बस, मेट्रो जैसे परिवहन साधनों के आसपास अधिक नियोजित विकास का प्रविधान है।

बैठक में किफायती आवास वाले क्षेत्रों तथा शहरी विस्तार मार्ग-2 के दोनों ओर अधिक घनत्व वाले गलियारे विकसित करने की योजना पर भी जानकारी दी गई। इसके अलावा कम घनत्व वाले क्षेत्रों और पहले से विकसित आवासीय, वाणिज्यिक तथा औद्योगिक इलाकों के पुनर्विकास से संबंधित नियमों पर चर्चा हुई।

यमुना क्षेत्र और विरासत संरक्षण भी एजेंडे में

मास्टर प्लान में यमुना और उसके बाढ़ क्षेत्र से जुड़े ओ-जोन के प्रविधानों पर भी विशेषज्ञों को जानकारी दी गई। इसमें यमुना और बाढ़ क्षेत्र के पुनर्जीवन से जुड़े नियोजन पहलुओं पर चर्चा हुई।

साथ ही ऐतिहासिक इमारतों और स्थलों के संरक्षण, व्यापक यातायात योजना तथा हस्तांतरणीय विकास अधिकार से संबंधित प्रविधान भी बैठक के एजेंडे में रहे।

झुग्गियों का उसी स्थान पर पुनर्विकास

बैठक में झुग्गी बस्तियों के उसी स्थान पर पुनर्विकास और पुनर्वास से जुड़ी योजनाओं पर भी चर्चा हुई। डीडीए ने निर्माण नियंत्रण नियमों को तर्कसंगत बनाने के लिए किए जा रहे बदलावों की जानकारी दी।

इसमें जमीन के इस्तेमाल से जुड़े प्रविधानों को सरल बनाने और एक ही क्षेत्र में अलग-अलग तरह की गतिविधियों की अनुमति को अधिक लचीला बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास शामिल हैं। डीडीए के मुताबिक इसका उद्देश्य विकास परियोजनाओं को सुविधाजनक बनाना और कारोबार में आसानी बढ़ाना है।

बैठक में विशेषज्ञों ने दिल्ली की पार्किंग व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और पुनर्विकास परियोजनाओं से जुड़े सुझाव भी दिए। छठे दौर की बैठक में एनबीसीसी, वास्तुकला परिषद, स्कूल आफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, भारतीय नगर नियोजक संस्थान, दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल हुए। सातवें दौर में डीडीए के अभियंता, वास्तुकार और नगर नियोजक शामिल हुए।

डीडीए के अनुसार एमपीडी-2047 को लेकर तीन महीने का हितधारक संवाद कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत करीब 20 बैठकें आयोजित की जानी हैं। इन बैठकों का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों से सुझाव लेकर मास्टर प्लान के प्रावधानों को बेहतर ढंग से समझना और इसके क्रियान्वयन में अधिक से अधिक लोगों तथा संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना है।

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