सत्येंद्र जैन के बाद DJB के पूर्व CEO को भी राहत, कोर्ट ने STP टेंडर घोटाला केस में 5 आरोपियों को दी जमानत
राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) टेंडर घोटाले में पांच आरोपियों को जमानत दे ...और पढ़ें

दिल्ली जल बोर्ड घोटाला केस में कोर्ट ने दी जमानत। फोटो: सांकेतिक
HighLights
दिल्ली जल बोर्ड STP घोटाले में पांच आरोपियों को जमानत मिली
पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को भी इसी मामले में जमानत
टेंडर शर्तों में बदलाव कर निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) टेंडर मामले में गिरफ्तार पांच आरोपितों को जमानत दे दी है।
पूर्व दिल्ली जल बोर्ड सीईओ उदित प्रकाश राय, नागेंद्र यादव, राज कुमार कुर्रा, पंकज वर्मा और अनिकेत श्रीवास्तव को दो-दो लाख रुपये के बॉन्ड पर जमानत मिली है। इससे पहले इसी मामले में पूर्व दिल्ली मंत्री सत्येंद्र जैन को भी जमानत मिल चुकी है।
STP टेंडर में गड़बड़ी का आरोप
मामला दिल्ली जल बोर्ड के STP के उन्नयन और क्षमता बढ़ाने से जुड़े टेंडर में कथित अनियमितताओं का है। दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने आरोप लगाया है कि टेंडर की शर्तों में इस तरह बदलाव किए गए, जिससे एक खास निजी कंपनी को फायदा मिल सके और प्रतिस्पर्धा सीमित हो।
ACB ने इस मामले में 11 मई 2024 को FIR दर्ज की थी। इसी मामले में 18 अगस्त 2026 को सत्येंद्र जैन समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
जांच में कई आरोप लगाए गए
ACB के मुताबिक, STP परियोजनाओं के टेंडर में कथित तौर पर प्रतिबंधात्मक तकनीकी शर्तें शामिल की गई थीं। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि इससे एक निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचा।
जांच में रोहिणी STP की क्षमता से जुड़े तकनीकी प्रस्ताव में बदलाव और कुछ STP को परियोजना में शामिल करने तथा कुछ को बाहर रखने के आरोप भी सामने आए हैं।
ACB के अनुसार, इन फैसलों से परियोजना की अनुमानित लागत में करीब 123 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। ये सभी आरोप जांच एजेंसी के हैं।
सत्येंद्र जैन को पहले मिल चुकी जमानत
इसी मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने तीन सितंबर को पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को भी जमानत दी थी। अदालत ने उन्हें दो लाख रुपये के निजी बॉन्ड पर जमानत दी थी।
जैन की जमानत पर सुनवाई के दौरान अदालत ने FIR दर्ज होने और गिरफ्तारी के बीच 27 महीने के अंतर पर भी सवाल उठाया था। अदालत ने कहा था कि इस अवधि में जांच एजेंसी ने उनकी शारीरिक हिरासत को जरूरी नहीं समझा था।
अदालत ने दस्तावेजी साक्ष्यों पर दिया जोर
सत्येंद्र जैन की जमानत के आदेश में अदालत ने कहा था कि मामले का आधार मुख्य रूप से आधिकारिक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य हैं।
जांच एजेंसी द्वारा नोट्स, फाइलें, तकनीकी प्रस्ताव, बैठकों के रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन से जुड़े दस्तावेज जब्त किए जा चुके हैं। मामले की जांच दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच कर रही है और आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में सुनवाई के दौरान होगी।
