डिजी यात्रा एप क्लोन कर चार की जगह 28 एयरपोर्ट पर किया लागू! KPMG के खिलाफ दिल्ली HC पहुंचा डेटा इवॉल्व
दिल्ली हाई कोर्ट में डिजी यात्रा एप को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। डेटा इवॉल्व सॉल्यूशंस ने आरोप लगाया है कि केपीएमजी ने अवैध रूप से उनके ऑफिस में प्रवेश कर एप को क्लोन किया। कंपनी ने केपीएमपी पर तकनीक क्लोन करने का आरोप लगाया है। यह भी आरोप लगाया कि बिना अनुमति के 28 एयरपोर्ट्स पर एप लागू करने का भी आरोप लगाया है। कोर्ट ने अगली सुनवाई 10 दिसंबर को तय की है।
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। स्मार्ट ट्रैवल एप डिजी यात्रा को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में गुरुवार को गंभीर मामला उठाया गया। सुनवाई के दौरान एप के निर्माण से जुड़ी कंपनी डेटा इवॉल्व सॉल्यूशंस ने आरोप लगाया कि वैश्विक ऑडिट एवं कंसल्टेंसी कंपनी केपीएमसी ने उनके हैदराबाद स्थित ऑफिस में अवैध तरीके से प्रवेश किया और एप को क्लोन कर लिया।
यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसी डीवाईएफएफ (Digi Yatra Foundation) ने उनकी तकनीक और सिस्टम को बिना अनुमति के कॉपी कर लिया और प को चार हवाई अड्डों तक सीमित रखने के सरकारी निर्देश को नजरअंदाज करते हुए इसे देश के 28 एयरपोर्ट्स पर लागू कर दिया।
कंपनी का दावा, तकनीक की क्लोनिंग की गई
डेटा इवॉल्व की ओर से कहा गया कि उन्होंने डिजी यात्रा एप का मूल सिस्टम, फीचर और सॉफ्टवेयर तैयार किया था, लेकिन बाद में डीवाईएफएफ ने न सिर्फ भुगतान रोक दिया, बल्कि एप की तकनीक को अपने पास ले जाकर उसकी क्लोनिंग की।
कंपनी ने अदालत में बताया कि टेक्नोलॉजी ऑडिट में कई ऐसे तत्व मिले हैं जिनसे यह साफ होता है कि मूल एप की कोडिंग और तकनीक को सीधे उपयोग किया गया। कंपनी ने इस आधार पर केपीएमजी और अन्य संबद्ध संस्थाओं पर भी सवाल उठाए हैं, जिन पर सिस्टम की अवैध कॉपी बनाने का आरोप है।
मामला कैसे शुरू हुआ?
2021 में डेटा इवॉल्व और डीवाईएफएफ के बीच तकनीक हस्तांतरण को लेकर सहमति बनी थी। कंपनी का दावा है कि उस समझौते के तहत एप और उससे जुड़ी सुविधाओं का मालिकाना हक उनके पास रहता, लेकिन समय के साथ पूरा कंट्रोल डीवाईएफएफ ने ले लिया और 2023 में उन्होंने पूरे सिस्टम के संचालन का अधिकार खुद संभाल लिया।
डेटा इवॉल्व का कहना है कि उनकी अनुमति के बिना सिस्टम को देशभर के 28 एयरपोर्ट्स पर लागू कर दिया गया, जबकि समझौते के अनुसार एप केवल चार एयरपोर्ट तक सीमित रहना था।
दूसरी ओर डीवाईएफएफ ने कोर्ट में कहा कि डिजी यात्रा एप और उससे जुड़ी सभी तकनीक उनका अपना विकसित किया हुआ सिस्टम है, और डेटा इवॉल्व के आरोप बेबुनियाद हैं। उनका कहना है कि एप को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने का फैसला उपभोक्ता सुविधा और सरकारी स्वीकृति के तहत लिया गया है।
अगली सुनवाई 10 दिसंबर को
हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों से आवश्यक दस्तावेज मांगे हैं और अगली सुनवाई 10 दिसंबर को निर्धारित की है। अदालत यह भी देखेगी कि वास्तव में किसके पास ऐप का मूल अधिकार था और क्या किसी पक्ष ने तकनीकी दुरुपयोग या अनुबंध उल्लंघन किया है।

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