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यमुना के पानी में अगस्त में सुधार, फिर भी 5 जगह मानक से ज्यादा मल-कोलीफार्म; ISBT पर BOD सबसे अधिक

Published: Tue, 22 Sep 2026 05:25 AM (IST)

दिल्ली में यमुना नदी के पानी की गुणवत्ता में अगस्त माह में सुधार दर्ज किया गया है, जिसमें मल-कोलीफार्म की ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. मल-कोलीफार्म में कमी, पर पांच स्थानों पर स्तर अधिक।

  2. बीओडी में सुधार, पर कई जगह मानक से काफी ऊपर।

  3. नालों का अपशिष्ट जल अभी भी यमुना प्रदूषण का कारण।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। यमुना के पानी की गुणवत्ता में जुलाई के मुकाबले अगस्त में सुधार दर्ज किया गया है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, नदी में मल-कोलीफार्म की मात्रा में कई स्थानों पर भारी गिरावट आई है।

हालांकि पांच स्थानों पर इसका स्तर अब भी निर्धारित सीमा 2,500 एमपीएन/100 मिलीलीटर से अधिक रहा। वहीं जैव-रासायनिक आक्सीजन मांग (बीओडी) में भी सुधार हुआ, लेकिन कई स्थानों पर यह तय मानक से कई गुना अधिक बनी हुई है।

डीपीसीसी दिल्ली में यमुना के सात स्थानों—पल्ला, वजीराबाद, आइएसबीटी पुल, आइटीओ पुल, निजामुद्दीन पुल, ओखला बैराज और हरियाणा के असगरपुर (किडवली)—से पानी के नमूने लेकर बीओडी, घुलित आक्सीजन, रासायनिक आक्सीजन मांग, पीएच और मल-कोलीफार्म समेत कई मानकों की जांच करता है। अगस्त में सभी छह प्रमुख दिल्ली स्थलों पर मल-कोलीफार्म में उल्लेखनीय कमी दर्ज हुई।

बीओडी में सुधार, लेकिन समस्या बरकरार

अगस्त में बीओडी तीन से 28 मिलीग्राम प्रति लीटर के बीच रही। जल गुणवत्ता मानक के अनुसार इसकी अधिकतम सीमा तीन मिलीग्राम प्रति लीटर है। आइएसबीटी पुल पर बीओडी सबसे अधिक 28 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज हुई। इसका मतलब है कि कई स्थानों पर नदी के पानी में जैविक प्रदूषण अब भी गंभीर स्तर पर बना हुआ है।

डीपीसीसी के अनुसार अगस्त में मल-कोलीफार्म में आई गिरावट का एक कारण नदी में पहुंचने वाले बिना उपचारित सीवर की मात्रा में कमी हो सकता है। हालांकि इस दौरान हुई बारिश ने भी नदी के पानी को पतला करने और गुणवत्ता में अस्थायी सुधार लाने में भूमिका निभाई हो सकती है।

नालों का पानी अब भी चिंता का कारण

डीपीसीसी ने अगस्त में दिल्ली के प्रमुख नालों के अपशिष्ट जल की गुणवत्ता के आंकड़े भी जारी किए हैं। यमुना में सीधे गिरने वाले कई नालों और नजफगढ़ नाले से जुड़े सहायक नालों के पानी में बीओडी और कुल निलंबित ठोस पदार्थ (टीएसएस) का स्तर काफी अधिक पाया गया।

इससे साफ है कि यमुना में प्रदूषण का बड़ा स्रोत बने नालों की स्थिति में अभी अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।

जुलाई और अगस्त में मल-कोलीफार्म की स्थिति

निगरानी स्थल जुलाई अगस्त
पल्ला 2,100 1,400
वजीराबाद 3,500 1,100
आइएसबीटी पुल 1,70,000 35,000
आइटीओ पुल 1,20,000 17,000
निजामुद्दीन पुल 1,30,000 13,000
ओखला बैराज 1,10,000 23,000
असगरपुर 3,20,000 36,000

इकाई : एमपीएन/100 मिलीलीटर

मानक क्या है : मल-कोलीफार्म की अधिकतम स्वीकार्य सीमा 2,500 और वांछित स्तर 500 एमपीएन/100 मिलीलीटर है। अगस्त में पल्ला और वजीराबाद को छोड़कर बाकी पांच स्थानों पर स्तर 2,500 से अधिक रहा।

बीओडी की स्थिति : अगस्त में बीओडी का स्तर 3 से 28 मिलीग्राम प्रति लीटर के बीच रहा, जबकि निर्धारित अधिकतम सीमा 3 मिलीग्राम प्रति लीटर है। आइएसबीटी पुल पर यह सर्वाधिक 28 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज हुआ।

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