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दिल्ली के 8 प्रमुख कॉरिडोर हुए सिग्नल-फ्री, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

Published: Sat, 11 Jul 2026 06:23 AM (IST)

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने जाम से राहत के लिए इंजीनियरिंग, तकनीक और जनभागीदारी पर आधारित कई नई पहल शुरू की ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. आठ प्रमुख कॉरिडोर सिग्नल-फ्री, यात्रा समय में कमी।

  2. 48 लाख से अधिक चालान, तकनीक से निगरानी बढ़ी।

  3. प्रोजेक्ट संगम से जनभागीदारी, 368 सुझावों पर कार्रवाई।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी में बढ़ते ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने इंजीनियरिंग, तकनीक और जनभागीदारी पर आधारित कई नई पहल शुरू की हैं। 25 प्रमुख कारिडोर के अध्ययन के बाद आठ कारिडोर को सिग्नल-फ्री बनाया गया है।

इनमें छह उत्तरी रेंज और दो पूर्वी रेंज के हैं। ट्रैफिक पुलिस का दावा है कि इन मार्गों पर वाहनों की आवाजाही पहले की तुलना में अधिक सुगम हुई है और यात्रा का समय भी कम हुआ है। वहीं, ट्रैफिक पुलिस ने 1,200 से अधिक डीटीसी चालकों और 300 होमगार्ड्स को सड़कों पर तैनात किया है।

यातायात पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त मनीष कुमार अग्रवाल के मुताबिक, सिग्नल-फ्री कारिडोर तैयार करने के लिए गैर-जरूरी ट्रैफिक सिग्नल हटाए गए, यू-टर्न की नई व्यवस्था की गई, अनधिकृत मीडियन कट बंद किए गए और कई चौराहों का पुनर्विकास किया गया।

इसका सकारात्मक असर एनएसपी से रिठाला मेट्रो स्टेशन और विकास मार्ग (लक्ष्मी नगर-करकरी मोड़) जैसे मार्गों पर देखने को मिला है। अधिकारी के मुताबिक, अन्य कारिडोर को भी चरणबद्ध तरीके से सिग्नल-फ्री बनाने का काम जारी है।

48.42 से अधिक चालान किए गए जारी

ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर भी कार्रवाई तेज की गई है। एक जनवरी से अब तक विभिन्न उल्लंघनों के लिए 48,42,953 चालान जारी किए गए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 47,52,173 चालान हुए थे।

रेड लाइट उल्लंघन और ओवरस्पीडिंग का पता लगाने वाली तकनीक के माध्यम से 17,21,221 ई-चालान जारी किए गए। वहीं खतरनाक तरीके से वाहन चलाने के मामलों में 2,187 एफआइआर दर्ज की गई हैं।

सभी एजेंसियों के साथ मिलकर किया जा रहा काम

जाम वाले स्थानों पर सुधार के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने पीडब्ल्यूडी, एमसीडी, एनएचएआइ, डीएमआरसी और डीटीसी के साथ मिलकर कई इंजीनियरिंग उपाय लागू किए हैं।

कश्मीरी गेट आइएसबीटी पर अतिरिक्त बस बे और पैदल यात्रियों की सुविधाएं विकसित की गईं, मजनू का टीला पर फुटओवर ब्रिज बदला गया, आनंद विहार आइएसबीटी पर पिक-अप और ड्राप-आफ जोन बनाए गए और अधचीनी गांव, आश्रम चौक और अन्य स्थानों पर बस स्टैंडों का पुनर्स्थापन किया गया। इन उपायों से कई प्रमुख जंक्शनों पर जाम में कमी आई है।

प्रोजेक्ट संगम के सामने आ रहे सकारात्मक परिणाम

जनभागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से तीन अप्रैल को शुरू किए गए प्रोजेक्ट संगम के भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इस पहल के तहत अब तक 309 बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें 514 सुझाव प्राप्त हुए।

इनमें से 368 सुझावों पर कार्रवाई पूरी हो चुकी है, जबकि शेष सुझाव संबंधित एजेंसियों को भेजे गए हैं। द्वारका, वेस्ट पटेल नगर और आजादपुर जैसे इलाकों में इस पहल के तहत किए गए बदलावों से ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार दर्ज किया गया है।

2.84 लाख से अधिक स्कूली छात्रों को किया जागरूक

सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में भी ट्रैफिक पुलिस का अभियान लगातार जारी है। एक जनवरी से 30 जून के बीच रोड सेफ्टी सेल ने 2.84 लाख से अधिक स्कूली छात्रों और 15.44 लाख से ज्यादा आम नागरिकों को जागरूक किया।

इसके अलावा 12 हजार से अधिक आटो, टैक्सी और ई-रिक्शा चालकों, 11 हजार से अधिक डीटीसी कर्मचारियों और 5,300 से अधिक कारपोरेट कर्मचारियों को सड़क सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया गया।

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