दिल्ली को मिलेंगी 200 नई इलेक्ट्रिक बसें, 6900 के पार पहुंचेगा बसों का बेड़ा; 5 चार्जिंग स्टेशन भी होंगे शुरू
दिल्ली में अगले सप्ताह 200 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल होंगी, जिससे बसों की कुल संख्या 6900 के पार हो जाएगी और 5 नए चार्जिंग स्टेशन भी शुरू होंगे।

दिल्ली में प्रदूषण रहित यात्रा को बढ़ावा देते हुए ईवी बसों की संख्या बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
दिल्ली को मिलेंगी 200 नई इलेक्ट्रिक बसें, बेड़ा 6900 पार।
आनंद विहार से 14 अक्टूबर को होगा बसों का शुभारंभ।
डीटीसी के सामने संचालन और चार्जिंग की चुनौतियां मौजूद।
वीके शुक्ला, नई दिल्ली। दिल्ली में अगले सप्ताह 200 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल होने जा रही हैं। 14 अक्टूबर को आनंद विहार से इन बसों का शुभारंभ किए जाने की योजना है। इनके शामिल होने के बाद राजधानी में बसों की कुल संख्या बढ़कर 6900 के पार हो जाएगी।
इसी अवसर पर पांच नए चार्जिंग स्टेशन भी शुरू करने की तैयारी है। हालांकि, बसों की संख्या बढ़ाने के साथ इनके सुचारु संचालन और प्रबंधन को लेकर दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के सामने कई चुनौतियां हैं।
बसों के फेरे भी बढ़ाने की तैयारी
डीटीसी के प्रबंध निदेशक पद से जितेंद्र यादव के गत चार अक्टूबर को तबादला हो जाने से यह पद रिक्त होने से भी प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। नई बसों को बेड़े में शामिल करने के बाद उन्हें अलग-अलग मार्गों पर तैनात करने के साथ साथ समय-सारिणी के अनुसार संचालन सुनिश्चित करना जरूरी होगा। बसों की संख्या बढ़ने का लाभ यात्रियों को तभी मिलेगा, जब मार्गों पर उनकी उपलब्धता और फेरों की संख्या भी बढ़े।
जरूरत के अनुसार करेंगे विस्तार
दूसरी बड़ी चुनौती चार्जिंग ढांचे को मजबूत करना है। इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ने के साथ डिपो में पर्याप्त चार्जिंग सुविधाएं, बिजली की उपलब्धता और बसों की चार्जिंग के लिए बेहतर व्यवस्था जरूरी होगी। पांच नए चार्जिंग स्टेशन शुरू होने से सुविधा बढ़ेगी, लेकिन बढ़ते बेड़े की जरूरतों के हिसाब से इस ढांचे का विस्तार भी करना होगा।
तकनीकी समस्याओं का समाधान करना होगा
वहीं, पिंक सहेली कार्ड व्यवस्था लागू होने के बाद महिला यात्रियों को इसके इस्तेमाल में आ रही दिक्कतों को दूर करना भी निगम के लिए अहम है। महिलाओं को कार्ड के उपयोग की सही जानकारी देना, बसों में सत्यापन की प्रक्रिया सुचारू रखना और तकनीकी समस्याओं का समाधान करना होगा।
व्यस्त रूट पर बढ़ेगी बसों की संख्या
इसके अलावा अलग-अलग मार्गों पर बसों की जरूरत का आकलन, भीड़ वाले मार्गों पर अतिरिक्त बसें चलाना और रूट संचालन में बेहतर तालमेल बनाना भी जरूरी है। ऐसे में नई बसों की शुरुआत के साथ डीटीसी के सामने सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और यात्रियों को भरोसेमंद परिवहन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी।
