क्या होती है SEM कोर्ट? जानिए CJP नेताओं के मामले से चर्चा में आए स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के अधिकार
दिल्ली में विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (एसईएम) अदालतों की भूमिका हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजने के बाद चर्चा में आई है।

सौरव दास और आशुतोष रांका को एसईएम कोर्ट ने ही भेजा था जेल। फोटो: आर्काइव
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत (जेल) में भेजने और फिर रिहाई के आदेश के बाद विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (एसईएम) की भूमिका चर्चा में है।
आम तौर पर लोग पुलिस की गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर जिस अदालत में पेशी की बात करते हैं, उसे न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत समझते हैं, लेकिन एसईएम की कार्यवाही इससे अलग है।
इस व्यवस्था में निर्धारित अधिकार प्राप्त सरकारी अधिकारी, जिनमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं, शांति भंग होने की आशंका वाले मामलों में मजिस्ट्रेट की शक्तियों का इस्तेमाल करते हैं।
एसईएम कोर्ट का काम किसी व्यक्ति पर लगे आपराधिक आरोपों का ट्रायल चलाकर दोष तय करना नहीं, बल्कि संभावित अशांति को रोकना होता है।
इसके तहत अशांति पैदा करने वाले आरोपियों से शांति बनाए रखने का बांड भरवाया जाता है, उसके बाद उन्हें जमानत पर छोड़ दिया जाता है।
कानून में निर्धारित परिस्थितियों में सुरक्षा नहीं देने पर उन्हें जांच पूरी होने तक हिरासत में रखने का आदेश भी दिया जा सकता है। यही वजह है कि इन कार्यवाहियों में दिए गए आदेश सीधे व्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकते हैं।
शांति भंग की आशंका पर भरवाया जाता है बांड
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126-170 के तहत यदि मजिस्ट्रेट को लगता है कि कोई व्यक्ति शांति भंग कर सकता है या सार्वजनिक शांति बिगाड़ सकता है, तो उससे शांति बनाए रखने के लिए बांड भरने को कहा जाता है।
ऐसी कार्यवाही प्रदर्शन, आपसी विवाद या अन्य संभावित तनाव की स्थिति में शुरू हो सकती है। हालांकि, केवल पुलिस की आशंका पर्याप्त नहीं है; मजिस्ट्रेट को कानून के अनुसार प्रक्रिया अपनानी होती है और संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर देना होता है।
सुरक्षा नहीं देने पर हो सकती है हिरासत
एसईएम की शक्तियां केवल नोटिस जारी करने तक सीमित नहीं हैं। जांच के दौरान आवश्यक सुरक्षा नहीं देने पर ऐसी परिस्थितियों में जेल भेजा जा सकता है।
जांच के बाद सुरक्षा की जरूरत साबित नहीं होने पर व्यक्ति को मुक्त करना होता है। जमानतदारों को अनुपयुक्त मानकर अस्वीकार करने के लिए भी कानून में जांच और कारण दर्ज करने जैसी शर्तें हैं।
एसईएम के आदेश से प्रभावित होती है स्वतंत्रता
इस व्यवस्था और नियमित न्यायिक अदालत के बीच अंतर महत्वपूर्ण है। एसईएम आपराधिक मुकदमे में दोषसिद्धि नहीं करता, लेकिन निवारक कार्यवाही में उसके आदेश से किसी व्यक्ति को हिरासत में रहना पड़ सकता है।
इसलिए आदेश का आधार, हिरासत की अवधि, बांड की शर्तें और जमानतदारों की उपयुक्तता महत्वपूर्ण हो जाती हैं।
सीजेपी नेताओं की हिरासत से चर्चा में आई व्यवस्था
सौरव दास और आशुतोष रांका के मामले में पहले शांति बांड के उल्लंघन के आरोप पर हिरासत का आदेश हुआ और बाद में जमानतदार स्वीकार किए जाने के बाद उनकी रिहाई का आदेश दिया गया।
इस घटनाक्रम ने एसईएम की कार्यवाही को सार्वजनिक चर्चा में ला दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया और उन्हें एसईएम के समक्ष उपलब्ध प्रक्रिया अपनाने तथा जरूरत पड़ने पर अपीलीय अदालत जाने का विकल्प बताया।
एसईएम व्यवस्था का उद्देश्य संभावित अशांति को रोकना है, लेकिन जब निवारक कार्रवाई का असर किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता पर पड़ता है, तो प्रक्रिया का पालन और आदेश में दर्ज कारण उतने ही अहम हो जाते हैं।
हर जिले में रोज लगती है एसईएम कोर्ट
हर जिले में रोज एक-एक एसईएम कोर्ट लगती है। इसके लिए जगह भी निर्धारित होती है। हर जिले के एक थाने की बिल्डिंग में एसईएम कोर्ट के लिए जगह निर्धारित होती है। वहीं पर एसईएम कोर्ट बैठती है।
एसईएम के लिए संबंधित जिले में तैनात किसी भी एक एसीपी रैंक के अधिकारी को उस जिले के डीसीपी को मनोनीत करने का अधिकार प्राप्त है।
जिले में मारपीट, झगड़ा आदि शांति भंग करने से संबंधित जितने भी मामले दर्ज होते हैं, उन सभी मामलों की सुनवाई जिले के एसईएम कोर्ट में ही होती है।
इसमें बांड भरने के बाद एसईएम कोर्ट दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपियों को अमूमन जमानत पर छोड़ देती है और हर माह दोनों पक्षों को कोर्ट की तारीख पर पेश होने के लिए समन जारी किया जाता है।
सीजेपी के हाई प्रोफाइल मामले में पहली बार देखा गया कि एसईएम ने दोनों नेताओं को दो बार जेल भेज दिया।
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