दिल्ली में आपदाओं से निपटने की तैयारी तेज, 18 टीमों वाले SDRF का प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा
दिल्ली सरकार ने SDRF के गठन की तैयारी तेज कर दी है, जिसका प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा गया है। इसका ...और पढ़ें

दिल्ली में इमारतों के गिरने या आग लगने की घटनाओं में बचाव एवं राहत कार्यों में तेजी लाने की दिशा में विचार किया जा रहा है। प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
दिल्ली में राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) का गठन प्रस्तावित।
कुल 18 टीमें होंगी, प्रत्येक में 47 कर्मी शामिल।
आपदाओं में त्वरित बचाव कार्य सुनिश्चित करना मुख्य लक्ष्य।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली में आए दिन इमारतें ढहने, आग लगने और अन्य आपदाओं से जुड़ी घटनाओं के बीच सरकार ने अपने राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के गठन की तैयारी तेज कर दी है।
इन घटनाओं में लोगों को समय पर राहत पहुंचाने और बचाव कार्य शुरू करने के लिए दिल्ली में अपनी विशेष आपदा मोचन इकाई की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।
इसी दिशा में राजस्व विभाग ने एसडीआरएफ के गठन का प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट के लिए भेज दिया है। उम्मीद है कि कैबिनेट की अगली बैठक में इस पर चर्चा हो सकती है।
कुल 18 टीमें गठित करने की योजना
- प्रस्तावित एसडीआरएफ में कुल 18 टीमें गठित करने की योजना है।
- प्रत्येक टीम में 47 कर्मी शामिल होंगे।
- इनमें से 13 टीमें राजस्व जिलों में तैनात की जाएंगी, जिससे आपदा की स्थिति में संबंधित क्षेत्र में जल्द से जल्द बचाव दल पहुंच सके।
- बल की शेष टीमों की तैनाती और जिम्मेदारियों का निर्धारण प्रस्ताव के अनुसार किया जाएगा।
आपात स्थिति में तत्काल शुरू हो सकेगा बचाव कार्य
दिल्ली में घनी आबादी, संकरी गलियों और बहुमंजिला इमारतों वाले क्षेत्रों में आग लगने या भवन ढहने जैसी घटनाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसके अलावा जलभराव और बाढ़ जैसी परिस्थितियों के साथ भूकंप तथा औद्योगिक दुर्घटनाओं में भी बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाने की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में प्रशिक्षित कर्मियों और विशेष उपकरणों से लैस एसडीआरएफ की भूमिका अहम होगी।
दिल्ली अग्निशमन सेवा और पुलिस की मदद लेंगे
फिलहाल, दिल्ली में इस तरह की आपात स्थितियों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), दिल्ली अग्निशमन सेवा और पुलिस की मदद ली जाती है।
अपना राज्य स्तरीय बल बनने से आपदा की सूचना मिलते ही स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित टीमों को सक्रिय करने में मदद मिलेगी।
इससे दूसरे बलों पर निर्भरता कम करने और राहत एवं बचाव कार्यों में समन्वय बेहतर बनाने की उम्मीद है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद बल के गठन, कर्मियों की तैनाती, प्रशिक्षण और जरूरी संसाधनों की व्यवस्था की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
