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पढ़ने में कमजोर बच्चों के लिए दिल्ली के स्कूलों में नई पहल, अब रोज 30 मिनट लगेगी Reading Period

Published: Tue, 11 Aug 2026 06:29 AM (IST)

राजधानी दिल्ली के सरकारी स्कूलों में छठी से आठवीं कक्षा के बच्चों की पढ़ने की क्षमता सुधारने के लिए शिक्षा ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 30 मिनट का रीडिंग पीरियड अनिवार्य।

  2. छठी से आठवीं कक्षा के बच्चों की पढ़ने की क्षमता सुधरेगी।

  3. यह पहल अब सभी विद्यार्थियों के लिए नियमित शैक्षणिक गतिविधि होगी।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी के सरकारी स्कूलों में छठवीं, सातवीं और आठवीं तक पहुंचने के बाद भी कुछ बच्चे सामान्य पाठ पढ़ने में सक्षम नहीं हैं। स्कूल प्रधानाचार्यों के अनुसार, ऐसे बच्चों के लिए पढ़ना सीखना अब किसी अतिरिक्त कौशल का विषय नहीं, बल्कि उनकी आगे की पढ़ाई के लिए जरूरी बुनियादी क्षमता है।

इसी सीखने के अंतर को दूर करने के लिए शिक्षा निदेशालय ने अब स्कूलों में हर दिन 30 मिनट का रीडिंग पीरियड (पठन कक्षा) अनिवार्य किया है। अब तक कमजोर बच्चों की रीडिंग क्षमता सुधारने के लिए मिशन बुनियाद और निपुण जैसी पहलों के तहत विशेष रूप से गर्मी की छुट्टियों में गतिविधियां कराई जाती रही हैं।

इन कार्यक्रमों में मुख्य रूप से उन विद्यार्थियों पर ध्यान दिया जाता था, जो अपनी कक्षा के अपेक्षित स्तर के अनुसार पढ़ नहीं पा रहे थे। लेकिन स्कूल स्तर पर ऐसा कोई स्थायी और सभी बच्चों के लिए अनिवार्य रीडिंग स्लाट नहीं था, जिसे पूरे शैक्षणिक सत्र में नियमित रूप से चलाया जाए।

कमजोर बच्चे ही नहीं, अब सभी पढ़ेंगे 

नई व्यवस्था में रीडिंग को सिर्फ कमजोर विद्यार्थियों के लिए सुधारात्मक गतिविधि रखने के बजाय पूरे स्कूल की नियमित शैक्षणिक गतिविधि बनाया गया है। यानी कक्षा में बच्चा पढ़ने में कमजोर हो या अच्छा, सभी विद्यार्थियों को रोजाना 30 मिनट पढ़ने का अवसर मिलेगा।

इस दौरान मौन पठन, किताबों पर चर्चा और अन्य पठन गतिविधियां कराई जाएंगी। स्कूलों को रोजाना 10-15 मिनट का ड्राप एवरीथिंग एंड रीड सत्र कराने के लिए भी कहा गया है।

इसके अलावा वर्षभर साप्ताहिक लाइब्रेरी पीरियड, जोर से पढ़कर सुनाने के सेशन, किताबों पर चर्चा, रीडिंग वाल, किताबों की समीक्षा, अखबार पढ़ना और समूह चर्चा जैसी गतिविधियां होंगी।

गर्मी की छुट्टियों की कवायद से आगे बढ़ी पहल 

स्कूलों में पहले भी लाइब्रेरी और रीडिंग से जुड़ी गतिविधियां होती रही हैं। वहीं, मिशन बुनियाद और निपुण के तहत सीखने का स्तर से पीछे चल रहे बच्चों के लिए विशेष हस्तक्षेप भी किए जाते रहे हैं।

लेकिन प्रधानाचार्यों के अनुभव के मुताबिक चुनौती यह है कि कुछ बच्चे माध्यमिक कक्षाओं तक पहुंचने के बाद भी धाराप्रवाह पढ़ नहीं पाते।

ऐसे में केवल छुट्टियों में या किसी विशेष अभियान के दौरान रीडिंग कराने के बजाय इसे दैनिक स्कूल रूटीन का हिस्सा बनाने की जरूरत महसूस की गई। नए कार्यक्रम में इसी कमी को दूर करने का प्रयास है।

अब निगरानी भी होगी 

शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों को पूरे साल रीडिंग गतिविधियों का कैलेंडर दिया है। साल में दो बार परिवार पठन सप्ताह, वार्षिक पठन उत्सव और पढ़ने की डायरी जैसी गतिविधियां भी होंगी।

विद्यार्थियों की पढ़ने की गतिविधियों का रिकार्ड रखा जाएगा और स्कूलों में मासिक निगरानी व पठन जुड़ाव रिपोर्ट तैयार होगी। पुस्तकालय में प्रत्येक विद्यार्थी के लिए कम से कम 20 किताबें उपलब्ध कराने का भी लक्ष्य है।

अब इस पहल की सफलता का पैमाना केवल यह नहीं होगा कि स्कूलों में रोज 30 मिनट पढ़ाया गया या नहीं, बल्कि यह होगा कि छठवीं से आठवीं तक पहुंचने वाले बच्चों में वास्तव में पढ़ने में प्रवाह और समझ कितनी सुधरी।

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