POCSO मामलों को लेकर DOE सख्त, स्टाफ की बैकग्राउंड चेकिंग से लेकर CCTV लगाने तक के कड़े निर्देश
दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और यौनिक अपराधों की रोकथाम के लिए स्टाफ की बैकग्राउंड चेकिंग, ...और पढ़ें

शिक्षा विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम जुलाई से दिल्ली के स्कूलों में इन दिशा-निर्देशों की समीक्षा शुरू करेगी।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बच्चों के खिलाफ अपराध, यौनिक अपराध या हिंसक अपराधों में दोषी पाए गए किसी भी स्कूल कर्मचारी को तुरंत ड्यूटी से हटा दिया जाए। दिल्ली शिक्षा निदेशालय (डीओई) ने इस संबंध में सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
निदेशालय ने स्कूलों में पोक्सो एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन को मजबूत करने के लिए नई बाल सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। गैर-अनुपालन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। शिक्षा विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम जुलाई से स्कूलों में इन दिशानिर्देशों की समीक्षा शुरू करेगी।
मुख्य दिशा-निर्देश
- बैकग्राउंड चेकिंग अनिवार्य: सभी शिक्षक, गैर-शिक्षक स्टाफ, ठेका कर्मी और अन्य सहयोगी कर्मचारियों की पुलिस वेरिफिकेशन कराई जाए। हर कर्मचारी को हलफनामा देना होगा कि उसके खिलाफ बच्चों के प्रति अपराध या हिंसक अपराध का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
- संभावित दुरुपयोग की अनिवार्य रिपोर्टिंग: स्कूलों को संदिग्ध यौनिक शोषण की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को देनी होगी। आंतरिक जांच का इंतजार नहीं किया जाएगा। रिपोर्ट न करने पर स्कूल प्रधानाचार्य को एक वर्ष तक की जेल हो सकती है।
- बाल संरक्षण समिति: हर स्कूल में प्रधानाचार्य के नेतृत्व में बाल संरक्षण समिति गठित करनी होगी। इसमें नोडल शिक्षक, अभिभावक प्रतिनिधि, काउंसलर, बाल अधिकार विशेषज्ञ और छात्र प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति हर तीन महीने में बैठक करेगी और शिकायतों की निगरानी करेगी।
जागरूकता और प्रशिक्षण
स्कूलों को छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। छात्रों को बॉडी ऑटोनॉमी, सुरक्षित-असुरक्षित स्पर्श, ऑनलाइन खतरे, साइबरबुलिंग, ग्रूमिंग और सेक्सटॉर्शन के बारे में संवेदनशील बनाया जाएगा। शिक्षकों को पोक्सो, किशोर न्याय अधिनियम और ट्रॉमा-इनफॉर्म्ड रिस्पॉन्स पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा उपाय
- सीसीटीवी फुटेज कम से कम 30 दिन तक सुरक्षित रखना अनिवार्य
- अच्छी रोशनी वाले गलियारे, अलग छात्र शौचालय, विजिटर मैनेजमेंट सिस्टम
- बाल हेल्पलाइन नंबर को जरूर प्रदर्शित करें
- यौनिक शोषण, बुलिंग, रैगिंग और शोषण पर शून्य सहनशीलता नीति
- गोपनीय शिकायत बॉक्स लगाने होंगे (स्टाफ निगरानी और सीसीटीवी से दूर)
स्कूल परिवहन के नए नियम
- बसें पीली रंग की होंगी, जीपीएस और दो अग्निशामक यंत्र अनिवार्य
- ड्राइवर का कॉमर्शियल लाइसेंस, कम से कम 5 साल का अनुभव और साफ आपराधिक रिकॉर्ड
- अंतिम बच्चे को छोड़ने तक महिला अटेंडेंट बस में मौजूद रहेंगी
बता दें कि ये दिशा-निर्देश स्कूलों में बाल सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माने जा रहे हैं। डीओई ने सभी स्कूलों को इनका सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
