विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

चंद 'बैसाखियों' के सहारे दिल्ली में सड़कों के खतरनाक गड्ढे, नोएडा जैसी दुर्घटना का हो रहा इंतजार

Published: Wed, 21 Jan 2026 02:03 AM (IST)

नोएडा में इंजीनियर की मौत के बाद दिल्ली में सड़कों पर खुले खतरनाक गड्ढों और नालों की गंभीर स्थिति सामने ...और पढ़ें

मौत की हृदयविदारक घटना ने नोएडा अथारिटी की गंभीर लापरवाही को सामने रखा।

मौत की हृदयविदारक घटना ने नोएडा अथारिटी की गंभीर लापरवाही को सामने रखा।

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। नोएडा में माल के बेसमेंट के लिए की गई खोदाई में डूबकर साफ्टवेयर इंजीनियर की दर्दनाक मौत की हृदयविदारक घटना ने नोएडा अथारिटी की गंभीर लापरवाही को सामने रखा है, जिसने उत्तर प्रदेश सरकार तक को हिला दिया है। दिल्ली में भी बीच सड़क या किनारे, ऐसे गहरे और खतरनाक गड्ढों को देखकर हैरानी नहीं होती, जिन्हें बांस-बल्ली की बैसाखियों के सहारे सुरक्षित मानकर सिस्टम ने राहगीरों के भाग्य भरोसे खुला छोड़ दिया है। अब कोई डूबे या चोटिल हो।

सिस्टम की यह जानबूझ लापरवाही नई नहीं है। इंतजार नोएडा जैसी दुर्घटना का है तब शायद गंभीरता आए। दैनिक जागरण की पड़ताल में ऐसे गड्ढे खूब मिले जिसे सरकारी एजेंसियों ने ही खोदा है और उसे वैसा ही खुला छोड़ दिया है, जो वहां से गुजरने वाले लोगों को चोटिल करने के साथ जानलेवा साबित हो सकते हैं।

पूर्वी दिल्ली में नाले की दीवार गायब

खजूरी खास की श्री राम कालोनी के मुख्य मार्ग के साथ गुजरते नाले की दीवार वर्षों से टूटी है। पिछले वर्ष एक साइकिल सवार नाले में गिर गया था, जिसे बचा लिया गया, उसके बाद टूटी दीवार के स्थान पर मलबा डाल दिया गया है। लेकिन चालक के ध्यान हटने की स्थिति में वाहन नाले में समा सकता है। इसी तरह कोंडली के पास भी नाले की दीवार नहीं है, जहां हादसे का खतरा बना हुआ है। गीता कालोनी स्थित चाचा नेहरू अस्पताल के पास नाले की दीवार का बड़ा हिस्सा पूरी तरह से ढह गया है। यह स्थिति एक वर्ष से है।

सोनिया विहार दूसरा पुश्ता पर एमसीडी द्वारा सीवर लाइन डालने के काम में सुरक्षा मानकों का ध्यान नहीं है। गलियाें में खोदे गए मैनहोन खुले पड़े हैं। स्थानीय निवासी विवेक सिंह ने बताया कि गत दिनों खोदे गए गड्ढे में गिरकर आठ साल का बच्चा चोटिल हो गया था।

दक्षिणी दिल्ली में बांस-बल्ली तो आधा खुला नाला

दक्षिणी दिल्ली के संगम विहार में करीब 20 दिनों से वर्षा के नाले की मरम्मत का काम चल रहा है, जिस क्रम में आधे नाले को बांस-बल्ली के सहारे ''सुरक्षित'' तो आधे वैसे ही खुला छोड़ दिया गया है। जबकि, प्रतिदिन वहां से शूटिंग रेंज से संगम विहार जाने के लिए लोग गुजरते हैं। वहां अंधेरा भी है, जो उसे खतरनाक बनाता है। इसी तरह, शाहीन बाग थाना के सामने नाले का पानी निकालने के लिए मुख्य मार्ग गहरा गड्ढा किया गया, उसमेें भी बांस बल्ली से सुरक्षित करने की तकनीक आजमाई गई है।


पश्चिमी दिल्ली में पालम से डाबरी मार्ग किनारे करीब दो किमी लंबे नाले में ऐसे कई स्थान है जहां नाला खुला ही नहीं है, बल्कि बिना किसी चेतावनी संकेतक व अवरोधक व्यवस्था के है, जो उसे खतरनाक बनाता है। यह नाला करीब 10 से 12 फीट गहरी है।

बाहरी दिल्ली में खोदे गए गड्ढे में फंस रहे वाहन

बाहरी दिल्ली के किराड़ी स्थित मेन मुबारकपुर रोड पर लाल मंदिर के पास सीवर निर्माण का काम चल रहा है। यहां गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं। कई दिनों से काम बंद है। यहां सुरक्षा के लिए बैरिकेड्स भी ठीक नहीं लगाए गए हैं। मंगलवाल रात उसी गड्ढे में एक वाहन का पहिया चला गया। लोगों ने काफी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला।

गौरी शंकर एन्क्लेव के वकील चौक के पास सीवर पाइपलाइन डालने के लिए गली नंबर-13 के बाहर खुदाई की गई है। जिनके आसपास गाद निकालकर छोड़ दी गई। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यहां खुले गड्ढों के किनारे बैरिकेडिंग जरूर की गई है। लेकिन बैरिकेट्स पर रिफ्लेक्टर लगे हुए हैं।

गड्ढों की घेराबंदी होने की वजह से लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित नजर आ रही है। वहीं, रोहिणी सेक्टर-20 स्थित सरकारी स्कूल के सामने सड़क के एक तरफ पाइप लाइन डालने के खुदाई की जा रही है। आरके प्लाजा तक बिना किसी सुरक्षा के गड्ढे खोदे जा रहे हैं। जिससे हादसे का डर बना हुआ है। मलका गंज में सीवर के लिए गहरा गड्ढा खोदा गया है, जो बिना किसी सुरक्षा मानक के है।

यह भी पढ़ें- गर्लफ्रेंड से नाराजगी के बाद युवक ने फंदे से लटककर दी जान, कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं