100 करोड़ बढ़ा खर्च, फिर भी दिल्ली की सड़कों पर नहीं बढ़ी हरियाली; PWD की नई व्यवस्था पर उठे सवाल
दिल्ली में सड़कों के किनारे हरियाली के रखरखाव पर पीडब्ल्यूडी का खर्च 100 करोड़ रुपये से अधिक बढ़ गया है, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है।

सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- ai generated
HighLights
पीडब्ल्यूडी का हरियाली रखरखाव खर्च 100 करोड़ रुपये बढ़ा।
68 पुरानी कंपनियों की जगह अब चार नई कंपनियां जिम्मेदार।
उचित देखभाल के अभाव में हरियाली अभी भी वर्षा पर निर्भर।
वी के शुक्ला, नई दिल्ली। सड़कों के किनारे हरियाली बढ़ाने और उसके रखरखाव पर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) का खर्च 100 करोड़ रुपये से अधिक बढ़ गया है, लेकिन राजधानी की सड़कों पर इसका अपेक्षित असर दिखाई नहीं दे रहा।
हरियाली अब भी वर्षा के भरोसे
विभाग ने अक्टूबर 2024 में जिन 68 कंपनियों को तीन वर्ष के लिए सड़कों के किनारे हरियाली के विकास और रखरखाव का कार्य सौंपा था, उनके अनुबंध निरस्त कर नई व्यवस्था के तहत चार कंपनियों को जिम्मेदारी दे दी है। नई व्यवस्था में परियोजना की लागत 174 करोड़ रुपये से बढ़कर 275 करोड़ रुपये पहुंच गई है।
सरकार पर 100 करोड़ से अधिक का वित्तीय बोझ
इस प्रकार ठेके बदलने के साथ सरकार पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ आ गया, लेकिन राजधानी की अधिकांश प्रमुख सड़कों पर हरियाली की स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं दिख रहा है। कई स्थानों पर पौधों की वृद्धि अपेक्षा से कम है।
पिछले दिनों हुई वर्षा में कुछ स्थानों पर पेड़ लगाए गए थे, मगर उनकी भी सुध लेने वाला कोई नहीं है। सड़कों के बीच सेंट्रल वर्ज और किनारों पर विकसित किए गए हरित क्षेत्र भी नियमित सिंचाई और रखरखाव के अभाव में प्रभावित हो रहे हैं।
68 की जगह 4 कंपनियों को जिम्मा
जानकारों का कहना है कि हरियाली विकसित करने के लिए केवल पौधारोपण पर्याप्त नहीं होता। नियमित सिंचाई, समय पर छंटाई, खाद और पौधों की सुरक्षा जैसी व्यवस्थाएं भी उतनी ही जरूरी हैं। मौजूदा स्थिति में कई स्थानों पर हरियाली का भविष्य अब भी वर्षा पर निर्भर दिखाई देता है। यदि मानसून सामान्य रहा तो पौधों को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन वर्षा कम होने पर हरियाली के सूखने का खतरा है।
सूत्रों के अनुसार नई एजेंसियों को बेहतर निगरानी, रखरखाव और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि अब तक जमीन पर इसका प्रभाव दिखाई नहीं दिया है। राजधानी में प्रदूषण कम करने और शहरी तापमान नियंत्रित रखने के लिए सड़क किनारे हरियाली का विस्तार महत्वपूर्ण माना जाता है।
ऐसे में बढ़े हुए बजट के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने से परियोजना की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। दिल्ली में लोक निर्माण विभाग के पास 1440 किलोमीटर लंबी सड़कें हैं। इनमें अधिकतर भाग में सेंट्रल वर्ज और दोनों किनारों पर हरियाली विकसित की गई है।
