दिल्ली PWD को मिला अपना इंजीनियरिंग कैडर, विकास कार्यों में देरी पर कसेगा शिकंजा; तय होगी जवाबदेही
केंद्र सरकार ने दिल्ली पीडब्ल्यूडी को सीपीडब्ल्यूडी कैडर से अलग कर अपना स्वतंत्र इंजीनियरिंग कैडर बनाने की मंजूरी दी है। ...और पढ़ें

अब दिल्ली में पीडब्ल्यूडी इंजीनियरिंग कैडर के रूप में कार्य कर सकेंगे इंजीनियर। एआई इमेज
HighLights
दिल्ली PWD को मिला अपना स्वतंत्र इंजीनियरिंग कैडर।
विकास कार्यों में देरी पर अब कसेगा शिकंजा, बढ़ेगी जवाबदेही।
केंद्र सरकार की मंजूरी से दिल्ली का विकास होगा तेज।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली के विकास कार्यों में अब केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की ओर से होने वाली देरी या दिक्कतों का कोई असर नहीं पड़ेगा। हर कार्य के लिए इंजीनियरों की जवाबदेही होगी। इंजीनियर्स के काम के आधार पर ही उनकी मार्किंग की जाएगी।
इससे दिल्ली को विकसित करने की राह तेज होगी। दरअसल, केंद्र सरकार ने पीडब्ल्यूडी के स्वीकृत इंजीनियरिंग पदों को सीपीडब्ल्यूडी कैडर से अलग कर स्वतंत्र दिल्ली पीडब्ल्यूडी इंजीनियरिंग कैडर के रूप में संचालित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
केंद्र सरकार की मंजूरी से क्या बदला?
जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार ने पीडब्ल्यूडी के स्वीकृत इंजीनियरिंग पदों को सीपीडब्ल्यूडी कैडर से अलग कर स्वतंत्र दिल्ली पीडब्ल्यूडी इंजीनियरिंग कैडर के रूप में संचालित करने के प्रस्ताव को मंजूरी देकर विकसित दिल्ली की राह को आसान कर दिया है।
यह निर्णय दिल्ली को तेजी से विकसित, सुरक्षित और विश्वस्तरीय राजधानी बनाने की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद दिल्ली सरकार ने कुछ समय पहले यह प्रस्ताव के केंद्र सरकार के पास भेजा गया था।
अब तक दिल्ली में कैसे होता था काम?
अब तक दिल्ली में विकास कार्यों को धरातल पर लाने के लिए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों की मदद ली जाती थी।
इसमें कई बार देरी होती थी। कार्य सम्पन्न होने के बाद यदि कोई लापरवाही का पता चलता था तो दिल्ली सरकार को अनुशासनात्मक कार्रवाई करने में भी दिक्कत होती थी।
कई बार उक्त इंजीनियर के तबादले आदि के चलते फाइलें घूमती रहती थीं, जवाबदेही मुंह ताकती रह जाती थी। ऐसे में केंद्र सरकार की यह मंजूरी दिल्ली सरकार के लिए राहत बन जाएगी।
काम के आधार पर होगी तैनाती?
अब पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर्स की तैनाती दिल्ली सरकार अपनी जांच और संस्तुति के आधार पर कर सकेगी। कोई खामी मिलने पर तुरंत जवाबदेही भी तय हो सकेगी। ऐसे में यह माना जा रहा है कि अब केंद्र शासित दिल्ली सरकार को अपने यहां किए जाने वाले विकास कार्यों को धरातल पर सफल बनाने में आसानी होगी।
