'हर रोज 400 करोड़ का नुकसान', प्रदर्शनों से थमा दिल्ली का कारोबार; CAT ने दी बड़ी चेतावनी
राजधानी दिल्ली में जारी विरोध-प्रदर्शनों से व्यापारिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने चेतावनी दी है।
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चांदनी चौक बाजार।
HighLights
विरोध प्रदर्शनों से दिल्ली के व्यापार पर गंभीर असर।
रोजाना 400 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान की आशंका।
त्योहारी सीजन में व्यापार और आजीविका पर चौतरफा मार।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में बीते कुछ दिनों से जारी विरोध-प्रदर्शनों के कारण व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है।
चांदनी चौक से सांसद व कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने रविवार को चेतावनी दी कि यदि बाजारों में यह व्यवधान लंबे समय तक बना रहा, तो दिल्ली में रोजाना 400 करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने अनुमान जताते हुए कहा कि 10 दिनों के भीतर यह आंकड़ा 4,000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम स्तर तक पहुंचने का अनुमान है।
आर्थिक गणित और संभावित नुकसान
सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि दिल्ली में औसतन रोजाना लगभग 2,200 करोड़ रुपये का व्यापारिक कारोबार होता है। ऐसे में राजधानी का व्यापक व्यापारिक ढांचा किसी भी प्रकार के व्यवधान से तुरंत और बुरी तरह चरमरा जाता है।
उन्होंने गणना स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि विरोध प्रदर्शनों के कारण व्यापार में 10 प्रतिशत की गिरावट आती है, तो दैनिक 220 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। 15 प्रतिशत व्यवधान पर यह आंकड़ा 330 करोड़ रुपये और 20 प्रतिशत व्यवधान की स्थिति में रोजाना 440 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
आगामी 10 दिनों में यही संभावित प्रभावित कारोबार 4,000 करोड़ रुपये के आसपास रहेगा। उन्होंने साफ किया कि ये आंकड़े जोखिम में पड़े व्यापारिक गतिविधियों के सांकेतिक आकलन हैं।
संवैधानिक अधिकारों का संतुलन आवश्यक
संवैधानिक मर्यादाओं का हवाला देते हुए खंडेलवाल ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत नागरिकों को अभिव्यक्ति की आजादी और अनुच्छेद 19(1)(बी) के तहत शांतिपूर्ण एकत्र होने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। परंतु, इसी संविधान का अनुच्छेद 19(1)(जी) प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद का व्यापार, व्यवसाय और आजीविका चलाने का समान अधिकार भी देता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रयोग के दौरान अन्य नागरिकों और कारोबारियों के वैध अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए। किसी एक मौलिक अधिकार का जश्न दूसरों की रोजी-रोटी पर संकट बनकर नहीं टूट सकता। शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सुरक्षित रहे, लेकिन आम जनता, व्यापारियों और श्रमिकों पर अकारण आर्थिक बोझ न पड़े।
व्यापारिक चक्र और आजीविका पर चौतरफा मार
खंडेलवाल के अनुसार, आंदोलनों का असर सिर्फ प्रदर्शन वाले स्थानों तक सीमित नहीं रहता। सड़कों पर लंबे जाम, ग्राहकों की घटी आवाजाही, माल की ढुलाई में रुकावट और कारोबारी समय में कटौती से पूरी आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती है।
उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा मार छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों पर पड़ती है, जिन्हें बिक्री ठप होने के बावजूद दुकान का किराया, कर्मचारियों का वेतन, बिजली का बिल और बैंक की किस्तें देनी पड़ती हैं।
त्योहारी और विवाह सीजन में भारी झटका
अक्टूबर से जनवरी का समय पूरे देश के व्यापार के लिए सबसे स्वर्णिम माना जाता है। इस दौरान देशभर के लोग खरीदारी करते हैं। दिल्ली उत्तर भारत का सबसे बड़ा थोक और वितरण केंद्र है।
खंडेलवाल ने अपील की है कि सभी पक्ष एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाएं ताकि लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति भी बनी रहे और त्योहारी व विवाह सीजन में दिल्ली का व्यापार और आम लोगों की आजीविका भी सुरक्षित रहे।
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