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मार्च में ही 34 डिग्री पहुंचा पारा, दिल्ली में पावर डिमांड बढ़ी; इस गर्मी में 9000 MW पार करने का अनुमान

Published: Fri, 06 Mar 2026 07:15 PM (IST)

दिल्ली में मार्च की शुरुआत में ही बढ़ी गर्मी से बिजली की खपत बढ़ गई है। इस गर्मी में अधिकतम ...और पढ़ें

दिल्ली में मार्च की शुरुआत में ही बढ़ी गर्मी से बिजली की खपत बढ़ गई है। फाइल फोटो

दिल्ली में मार्च की शुरुआत में ही बढ़ी गर्मी से बिजली की खपत बढ़ गई है। फाइल फोटो

HighLights

  1. दिल्ली में मार्च से ही बढ़ी गर्मी, बिजली खपत में वृद्धि।

  2. इस गर्मी में बिजली की मांग 9000 MW पार कर सकती है।

  3. डिस्कॉम AI/ML से मांग का अनुमान, आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। मार्च के पहले हफ्ते में पिछले सालों के मुकाबले ज्यादापहु गर्मी पड़ रही है। मैक्सिमम टेम्परेचर 34 डिग्री सेल्सियस के आस-पास है। इससे पावर कंजम्पशन बढ़ गया है। पिछले दो सालों से मैक्सिमम डिमांड 8,000 MW से ज़्यादा बनी हुई है।

2 जून 2024 को मैक्सिमम डिमांड रिकॉर्ड 8,656 MW तक पहुंच गई थी। पिछले साल जून में भी मैक्सिमम डिमांड 8,442 MW थी। इस गर्मी में मैक्सिमम डिमांड 9,000 MW से ज्यादा हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों (DISCOMs) ने तैयारी शुरू कर दी है।

BSES राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL), BSES यमुना पावर लिमिटेड (BYPL), और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL) पावर डिमांड का अंदाजा लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करती हैं।

अधिकारियों का कहना है कि मौसम का भी पावर कंजम्पशन पर असर पड़ता है, इसलिए मौसम के अनुमान को ध्यान में रखा जाता है। अनुमान के हिसाब से पावर की अवेलेबिलिटी पक्की की जा रही है। दोनों BSES कंपनियों को लॉन्ग-टर्म एग्रीमेंट से 2,800 MW से ज्यादा बिजली मिलेगी, लगभग 2,100 MW रिन्यूएबल एनर्जी और 500 MW पावर बैंकिंग से मिलेगी। 40 MW दिल्ली में मौजूद वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट से और लगभग 200 MW कंज्यूमर की छतों पर लगे रूफटॉप सोलर पैनल से मिलेगी।

इसी तरह, TPDDL को लॉन्ग-टर्म, मीडियम-टर्म और शॉर्ट-टर्म एग्रीमेंट से लगभग 2,850 MW बिजली मिलेगी। पावर बैंकिंग के तहत, दिल्ली की बिजली कंपनियां सर्दियों में जब डिमांड कम होती है, तो दूसरे राज्यों को बिजली सप्लाई करती हैं। जब गर्मियों में डिमांड बढ़ती है, तो उन्हें उन राज्यों से बिजली वापस मिलती है। बिना रुकावट सप्लाई पक्का करने के लिए पावर नेटवर्क को भी अपग्रेड किया गया है।