दिल्ली पुलिस और राहुल गांधी का 169 साल पुराना रिश्ता, कौन थे 1857 में आखिरी कोतवाल पंडित गंगाधर?
दिल्ली पुलिस का इतिहास 789 साल पुराना है, जिसकी शुरुआत कोतवाल व्यवस्था से हुई थी। इसमें दिल्ली के पहले कोतवाल ...और पढ़ें

दिल्ली के पुलिस के आखिरी कोतवाल के परिवार से आते हैं राहुल गांधी। फोटो: दिल्ली पुलिस एवं इंटरनेट
HighLights
दिल्ली पुलिस का इतिहास करीब 789 साल पुराना है
मलिक-उल-उमरा फखरुद्दीन दिल्ली के पहले कोतवाल बने थे
गंगाधर नेहरू का राहुल गांधी के परिवार से संबंध है
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस का इतिहास करीब 789 साल पुराना है। आज जिस दिल्ली पुलिस के पास 6 रेंज, 15 पुलिस जिले और 209 पुलिस स्टेशन हैं, उसकी शुरुआत कभी कोतवाल व्यवस्था से हुई थी।
क्या आप जानते हैं कि दिल्ली के पहले और आखिरी कोतवाल कौन थे? इतना ही नहीं आखिरी कोतवाल का रिश्ता आगे चलकर पंडित मोतीलाल नेहरू, पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राहुल गांधी से जुड़ता है।

पुरानी तस्वीरों से फिर चर्चा में इतिहास
हाल ही में दिल्ली पुलिस ने #80sTrend में हिस्सा लेते हुए अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर 1980 के दशक की पांच पुरानी वास्तविक तस्वीरें साझा कीं। दिल्ली पुलिस ने तस्वीरों के साथ लिखा कि जब उसके पास ओरिजिनल फोटो हैं, तो उन्हें एआई से बनवाने की जरूरत क्यों है।
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इन तस्वीरों में साड़ी पहने महिला पुलिसकर्मियों का फायरिंग अभ्यास, परेड करते पुलिसकर्मी, सलामी लेते अधिकारी, कार में वायरलेस का इस्तेमाल करते पुलिसकर्मी और कारों के काफिले के पास खड़े पुलिसकर्मी नजर आए।
इन पुरानी तस्वीरों के सामने आने के साथ दिल्ली पुलिस के लंबे इतिहास और उसके पुराने पुलिसिंग सिस्टम से जुड़ी कई रोचक जानकारियां भी सामने आती हैं। आइए जानते हैं, दिल्ली पुलिस का इतिहास...
फखरुद्दीन बने थे दिल्ली के पहले कोतवाल
दिल्ली पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, 1237 ईस्वी में 40 वर्षीय मलिक-उल-उमरा फखरुद्दीन दिल्ली के पहले कोतवाल बने थे। वह बलबन, कैकुबाद और कैखुसरो के शासनकाल में भी इस पद पर बने रहे।
उस समय कोतवाल या दिल्ली पुलिस का मुख्यालय किला राय पिथौरा में था, जो आज महरौली के नाम से जाना जाता है।

गंगाधर नेहरू थे आखिरी कोतवाल
1648 में सम्राट शाहजहां ने अपनी राजधानी आगरा से दिल्ली स्थानांतरित की। इसके बाद गजनफर खान को दिल्ली का नया कोतवाल नियुक्त किया गया।
1857 की क्रांति के दौरान कोतवाल व्यवस्था समाप्त कर दी गई। उस समय गंगाधर नेहरू दिल्ली के आखिरी कोतवाल थे। गंगाधर नेहरू, पंडित मोतीलाल नेहरू के पिता और भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के दादा थे।

गंगाधर नेहरू। फोटो: इंटरनेट
जवाहरलाल नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी थीं और इंदिरा गांधी के पोते कांग्रेस नेता राहुल गांधी हैं। इस तरह दिल्ली के आखिरी कोतवाल का रिश्ता राहुल गांधी के परिवार से जुड़ता है।
1857 के बाद बदली पुलिस की तस्वीर
1857 की आजादी की पहली लड़ाई के बाद अंग्रेजों ने 1861 में इंडियन पुलिस एक्ट लागू किया। इसके बाद दिल्ली में पुलिसिंग को संगठित रूप दिया गया और कोतवाल व्यवस्था के स्थान पर पुलिस का नया ढांचा विकसित हुआ।
समय के साथ दिल्ली पुलिस की संरचना और जिम्मेदारियां भी बदलती गईं। एक दौर ऐसा भी रहा, जब दिल्ली और पंजाब पुलिस एक ही इकाई का हिस्सा थीं।

1912 में एक थी दिल्ली पंजाब पुलिस
1912 में दिल्ली और पंजाब पुलिस एक ही इकाई हुआ करती थी। इसी साल दिल्ली पुलिस को पहला मुख्य आयुक्त मिला, जिसे पुलिस महानिरीक्षक की शक्तियां भी हासिल थीं।
1912 के गजट के अनुसार, दिल्ली जिला पुलिस एक डीआईजी के नियंत्रण में थी और उसका मुख्यालय अंबाला में था। दिल्ली जिले में पुलिस बल की कमान एक सुपरिटेंडेंट और एक डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस के हाथ में थी।
उस समय पुलिस बल में 2 इंस्पेक्टर, 27 सब-इंस्पेक्टर, 110 हेड कांस्टेबल, 985 कांस्टेबल और 28 घुड़सवार पुलिसकर्मी थे। सोनीपत और बल्लभगढ़ पुलिस मुख्यालय हुआ करते थे।
आजादी से पहले सिर्फ तीन थाने
आजादी से पहले दिल्ली शहर में केवल तीन पुलिस स्टेशन थे। कोतवाल, सब्जी मंडी और पहाड़गंज। सिविल लाइंस में पुलिसकर्मियों के लिए बड़ी बैरकें थीं। इनमें रिजर्व, आर्म्ड रिजर्व और नए भर्ती हुए पुलिसकर्मी रहते थे।
1946 में दिल्ली पुलिस का पुनर्गठन हुआ और पुलिस बल की संख्या दोगुनी हो गई। भारत विभाजन के बाद बड़ी संख्या में लोग दिल्ली आए। 1948 में दिल्ली में अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ा तो 16 फरवरी को दिल्ली पुलिस में पहले आईजीपी की नियुक्ति हुई। इसी दौरान पुलिस बल की संख्या बढ़कर 8,000 हो गई।

1978 में लागू हुई कमिश्नर प्रणाली
1956 में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस का पद सृजित किया गया। 1961 तक दिल्ली में पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़कर 12,000 हो गई थी।
भारत सरकार ने जस्टिस जीडी खोसला की अध्यक्षता में दिल्ली पुलिस कमीशन बनाया। इसकी सिफारिशों के आधार पर पुलिस व्यवस्था में सुधार किए गए। दिल्ली पुलिस को नॉर्थ, सेंट्रल, साउथ और न्यू दिल्ली, चार जिलों में बांटा गया।
इसके बाद 1 जुलाई 1978 को दिल्ली में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की गई। यहीं से दिल्ली पुलिस की मौजूदा कमिश्नरेट व्यवस्था की नींव पड़ी।
आज 209 पुलिस स्टेशन संभालते हैं दिल्ली
श्रीवास्तव कमेटी की सिफारिशों के बाद दिल्ली पुलिस की नफरी बढ़ाकर 76 हजार से ज्यादा कर दी गई। वर्तमान में दिल्ली में 6 रेंज, 15 पुलिस जिले और 209 पुलिस स्टेशन हैं।
दी गई जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस फोर्स की संख्या लंदन, पेरिस और न्यूयॉर्क से भी बड़ी है।
वर्तमान में आईपीएस अनुराग कुमार दिल्ली पुलिस आयुक्त हैं। उन्होंने 17 जुलाई 2026 को आईपीएस सतीश गोलचा की जगह दिल्ली पुलिस आयुक्त का पदभार संभाला।
789 साल की पुलिस व्यवस्था की कहानी
- 1237 मलिक-उल-उमरा फखरुद्दीन पहले कोतवाल बने
- 1648 शाहजहां ने राजधानी आगरा से दिल्ली लाई
- 1857 कोतवाल व्यवस्था समाप्त हुई
- 1861 इंडियन पुलिस एक्ट लागू हुआ
- 1912 दिल्ली और पंजाब पुलिस एक इकाई थीं
- 1948 दिल्ली में पहले आईजीपी की नियुक्ति
- 1956 डीआईजी का पद सृजित हुआ
- 1 जुलाई 1978 पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू हुई
- 2026 आईपीएस अनुराग कुमार दिल्ली पुलिस आयुक्त
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