दुल्हनों की तस्वीरें भेज मैट्रिमोनियल कॉल सेंटर के नाम पर ठगी करता था वकील, 7 महिला समेत 8 गिरफ्तार
मध्य जिले की साइबर थाना पुलिस ने शादी के नाम पर पुरुषों को ठगने वाले एक कॉल सेंटर का भंडाफोड़ ...और पढ़ें

व्हाट्सएप्प पर दुल्हनों की तस्वीरें भेजकर पुरुषों को अपने जाल में फंसाकर ठगी करते थे शातिर। प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
दिल्ली पुलिस ने शादी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया।
आगरा में चल रहे कॉल सेंटर से वकील समेत आठ लोग गिरफ्तार।
फर्जी पोर्टल 'शादी-पार्टनर डाॅट काॅम' से पुरुषों को ठगा जाता था।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। मध्य जिले की साइबर थाना पुलिस की टीम ने शादी कराने के नाम पर पुरुषों को ठगने वाले एक काॅल सेंटर का भंडाफाेड़ किया है।
यह गिरोह आगरा में एक वकील-मास्टरमाइंड द्वारा चलाया जा रहा था, जो 'शादी-पार्टनर डाॅट काॅम' नामक ब्रांडेड मैट्रिमोनियल पोर्टल की आड़ में देशभर में शादी करने के इच्छुक पुरुषों को ठगता था।
पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड बीए एलएलबी कर चुके अधिवक्ता अमित कुमार, कंपनी की मैनेजर जया शाक्य समेत सात महिला टेलीकाॅलर्स को गिरफ्तार किया है।
देश के कई राज्यों में फैलाया था नेटवर्क
एनसीआरपी पोर्टल पर इस गिरोह से संबंधित छह शिकायतें अब तक सामने आई हैं। जांच में पुलिस को शक है कि गिरोह पिछले एक साल में हजारों पुरुषों को अपना शिकार बनाकर ठगी कर चुका है। इनके कब्जे से एक कार, 50 हजार नकद, सात डेस्कटाप सीपीयू और 47 मोबाइल बरामद हुए हैं।
मध्य जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, एनसीआरपी पोर्टल पर एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी जिसे 'शादीपार्टनर.काॅम' वेब पोर्टल के जरिये शादी के लिए रिश्ते दिलाने का झूठा वादा करके ठगा गया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
इसमें पता चला कि यह मामला 'शादीपार्टर.काॅम' नामक एक फर्जी वेब पोर्टल के जरिये चलाए जा रहे संगठित, पूरे देश में फैले शादी-ब्याह से जुड़े साइबर फ्राड सिंडिकेट से जुड़ा था। यह सिंडिकेट पिछले एक साल से यह रैकेट चला रहा था और देश के अलग-अलग हिस्सों में शादी के इच्छुक पुरुषों को सुनियोजित तरीके से अपना शिकार बना रहा था।
वाट्सएप पर भेजते थे आकर्षक दुल्हनों की तस्वीरें
पीड़ित को फंसाने के लिए, धोखेबाजों ने शुरू में उसके वाट्सएप पर आकर्षक संभावित दुल्हनों की तस्वीरें भेजीं। भरोसा पक्का करने और असली मैचमेकिंग प्रक्रिया जैसा माहौल बनाने के लिए, सिंडिकेट ने फोन पर बातचीत का नाटक किया और शिकायतकर्ता व संभावित दुल्हन के बीच सीधी बातचीत करवाई।
जब पीड़ित ने दिलचस्पी दिखाई, तो जालसाजों ने पीड़ित को कई चरणों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए उकसाया। शिकायतकर्ता से रजिस्ट्रेशन चार्ज, प्रोफाइल एक्सेस फीस, प्रोफाइल एक्टिवेशन चार्ज और कान्टैक्ट अनलॉक फीस जैसे अलग-अलग बहाने बनाकर उससे कुल 15 हजार रुपये ठग लिए।
ऐसे हुआ गिरोह का भंडाफोड़
तकनीकी जांच और पैसों के लेन-देन के विश्लेषण से पता चला कि ठगी गई पूरी रकम सीधे सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के करंट अकाउंट नंबर में जमा की गई थी, जो 'शादीपार्टनर.काॅम' नाम की कॉमर्शियल एंटिटी के नाम पर रजिस्टर्ड था।
डिजिटल रिकाॅर्ड और बैंकिंग केवाईसी से पुष्टि हुई कि जया शाक्य उर्फ शशि, इस बेनिफिशियरी अकाउंट की एकमात्र मालिक और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता है। इस बैंक अकाउंट का संबंध देश भर में दर्ज छह शिकायतों से मिला, जिससे पता चला कि एक सक्रिय और संगठित गिरोह काम कर रहा था।
छापेमारी में संचालित मिला काॅल सेंटर
पुलिस टीम ने चार सितंबर को सिकंदरा इलाके में रामाजी धाम अपार्टमेंट में चल रहे एक गैर-कानूनी टेली-कालिंग काल सेंटर पर छापा मारा। मौके से ही काल सेंटर की मैनेजर जया शाक्य और आठ महिला टेली-कालर्स को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि इस पूरे काल सेंटर को एक प्रैक्टिसिंग वकील, अमित कुमार ने फाइनेंस किया था, वही इसका मालिक था और वही इसका मास्टरमाइंड भी था।
खुद को फर्म का 'कानूनी सलाहकार' बताया
पुलिस से बचने के लिए उसने शादीपार्टनर.काॅम नाम की प्रोप्राइटरशिप फर्म बनाई और मुख्य कंपनी नेटनेक्सिस साल्यूशंस (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक फ्रैंचाइजी एग्रीमेंट किया। साथ ही उसने इस प्रोप्राइटरशिप फर्म को एमएसएमई और यूपी लेबर डिपार्टमेंट में भी रजिस्टर कराया।
सभी बैंकिंग चैनल और सिम कार्ड फर्म के नाम पर लिए गए थे ताकि जांच का कोई भी सुराग महिला मैनेजर पर जाकर रुक जाए। वकील ने खुद को फर्म का 'कानूनी सलाहकार' बताया ताकि वे पुलिस की जांच से बच सके और जरूरत पड़ने पर पल्ला झाड़ सके।
ऐसे पकड़ा गया मुख्य आरोपित
काॅल सेंटर में छापेमारी की खबर सुन अमित ने अपना मोबाइल बंद कर दिया और अंडरग्राउंड हो गया। टेक्निकल सर्विलांस की मदद से पुलिस ने आगरा में उसकी गतिविधियों का पता लगाया और आठ सितंबर को जब वे अपने गिरफ्तार साथी के लिए कानूनी दांव-पेच और जमानत की तैयारी कर रहे था तभी उसे काला कुंज इलाके में घेरकर पकड़ लिया।
वे हुंडई क्रेटा कार चला रहा था, जिसकी विंडशील्ड पर 'एडवोकेट' का स्टिकर लगा था। पकड़े जाने पर उसने यूपी स्टेट बार काउंसिल का अपना पहचान-पत्र दिखाया। हालांकि, ठोस डिजिटल सबूत दिखाने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
