फ्रांस के प्रदर्शनों के बाद दिल्ली में एजेंसियां अलर्ट, JNU-DU समेत दिल्ली के कई शिक्षण संस्थान रडार पर
फ्रांस में भड़के छात्र आंदोलन और विरोध प्रदर्शनों के बाद दिल्ली पुलिस समेत केंद्रीय एजेंसियां अलर्ट पर हैं। जेएनयू, डीयू ...और पढ़ें

स्पेशल सेल की टीम सोशल मीडिया की सघन माॅनिटरिंग करने से लेकर बाहर से आने वाले काॅल्स समेत सभी शिक्षण संस्थानों पर पैनी नजर रख रही है। प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
फ्रांस के छात्र आंदोलन से दिल्ली में सतर्कता बढ़ी।
जेएनयू, डीयू जैसे शिक्षण संस्थानों पर कड़ी नजर।
सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री की निगरानी जारी।
राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। फ्रांस में भड़के छात्र आंदोलन और विरोध प्रदर्शनों की गूंज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुनाई दे रही है। फ्रांस की इस उथल-पुथल को देखते हुए दिल्ली पुलिस समेत तमाम केंद्रीय एजेंसियां पूरी तरह चौकन्नी हो गई हैं।
दिल्ली में किसी भी संभावित अप्रिय स्थिति या विदेशी घटनाओं के असर को भांपते हुए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। स्पेशल सेल की टीम सोशल मीडिया की सघन माॅनिटरिंग करने से लेकर बाहर से आने वाले काॅल्स समेत सभी शिक्षण संस्थानों पर पैनी नजर रख रही है।
...ताकि अचानक कोई उग्र प्रदर्शन शुरू न हो
खुफिया सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां शहर के प्रमुख विश्वविद्यालयों (जैसे जेएनयू, डीयू आदि) और अन्य संस्थानों में सक्रिय वामपंथी विचारधारा से जुड़े छात्र संगठनों, नेताओं और छात्र नेताओं की गतिविधियों पर बेहद करीबी नजर रख रही हैं। पुलिस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि फ्रांस की घटनाओं से प्रेरणा लेकर दिल्ली या देश के अन्य हिस्सों में किसी प्रकार का भड़काऊ माहौल न बनाया जाए या अचानक कोई उग्र प्रदर्शन शुरू न हो।
एलआईयू और स्पेशल ब्रांच अलर्ट मोड पर
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के एक अधिकारी का कहना है कि राजधानी के संवेदनशील इलाकों, खासकर यूनिवर्सिटी कैंपस और विदेशी दूतावासों के आसपास के क्षेत्रों में लोकल इंटेलिजेंस यूनिट और स्पेशल ब्रांच को अलर्ट कर दिया गया है। इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म्स पर भी पैनी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की अफवाह या भड़काऊ सामग्री को फैलने से रोका जा सके जो छात्रों को उकसा सकती है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए तैयार दिल्ली पुलिस
इस पूरे मामले पर दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि हालांकि यह पूरी तरह से फ्रांस का आंतरिक मामला है, लेकिन यदि फ्रांस की पुलिस या वहां की अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां इस संबंध में आधिकारिक तौर पर दिल्ली पुलिस या भारतीय समकक्षों से संपर्क करती हैं, तो नियमों के तहत उन्हें हरसंभव मदद और सहयोग प्रदान किया जाएगा।
सोशल मीडिया पर कड़ी नजर
फिलहाल, एहतियात के तौर पर दिल्ली के शैक्षणिक संस्थानों और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त कर दिया गया है ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बनी रहे।
दिल्ली भी पिछले चार महीने से देश व सरकार विरोधी तत्वों से जूझ रही है। सोशल मीडिया के जरिये उपज रहे इस तरह के आंदोलन ने कई देशों में सरकार व सुरक्षा एजेंसियों के लिए मुश्किलें पैदा कर रही हैं। इस तरह के आंदोलन को बहुत ही सावधानी पूर्वक बेहतर रणनीति के जरिये हैंडल किया जा रहा है।
फ्रांस में किस तरह से भड़का जनाक्रोश?
ज्ञात रहे फ्रांस में महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ भड़का जनाक्रोश के कारण 17 अक्टूबर को पूरे फ्रांस में 110 जगहों पर करीब 5.5 लाख से 8 लाख लोगों ने प्रदर्शन किया, कई शहरों में लूटपाट, आगजनी और पुलिस से झड़प हुई। पेरिस में दो इलाकों में नाइट कर्फ्यू लगाना पड़ा। फ्रांस के येलो वेस्ट आंदोलन ने 24 और 31 अक्टूबर को फिर बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है।
फ्रांस की हिंसा से भारत में हो रहे प्रदर्शनों का क्या है 'लिंक'?
इस घटनाक्रम को लेकर भारत की सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, एजेंसियों ने फ्रांस के आंदोलन को भारत के संदर्भ में आंकलन शुरू कर दिया है, खासकर वामपंथी विचारधारा वाले समूहों और उनके डिजिटल नेटवर्क पर। फ्रांस में आंदोलन की शुरुआत स्कूली छात्रों ने की, फिर ट्रेड यूनियन, किसान और येलो वेस्ट जुड़ गए। भारत में भी हाल के वर्षों में इसी तरह के गठजोड़ बनाने की कोशिश का ट्रैक रिकाॅर्ड रहा है।
एजेंसियां रख रहीं हर गतिविधि पर नजर
एजेंसियां देख रही हैं कि क्या उसी माॅडल को यहां दोहराने की कोशिश हो रही है। फ्रांस के वीडियो और तस्वीरों को भारत के संदर्भ में एडिट कर प्रसारित करने की कोशिशों पर नजर है। सूत्रों का कहना है कि कुछ वामपंथी हैंडल फ्रांस की हिंसा को 'सिस्टम के खिलाफ जायज गुस्सा' के तौर पर महिमामंडित कर रहे हैं, जिसे लेकर डिजिटल निगरानी बढ़ा दी गई है।
सुरक्षा एजेंसियों का फोकस उन छात्र संगठनों और वामपंथी नेताओं पर है जिनका फ्रांस या यूरोप के वामपंथी समूहों से वैचारिक संपर्क रहा है। किसी नेता पर सीधी कार्रवाई नहीं, लेकिन उनके बयानों, विदेशी फंडिंग वाले सेमिनारों और प्रस्तावित प्रदर्शनों का इंटेलिजेंस आंकलन किया जा रहा है।
