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दिल्ली की 1511 अनधिकृत कॉलोनियों में मालिकाना हक की फीस 75% घटी, फिर भी आवेदन से कतरा रहे लोग

Published: Tue, 29 Sep 2026 06:13 AM (IST)Updated: Tue, 29 Sep 2026 07:20 AM (IST)

दिल्ली में पीएम उदय योजना के तहत अनधिकृत कॉलोनियों में मालिकाना हक देने के लिए लोगों की कम रुचि को ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. अनधिकृत कॉलोनियों में मालिकाना हक देने की योजना।

  2. एमसीडी और डीडीए ने शुल्क में 75% कटौती की।

  3. पीएम उदय योजना में लोगों की कम भागीदारी।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में 1511 अनधिकृत कालोनियों में 20 लाख से अधिक संपत्ति मालिकों को मालिकाना हक देने की बात है लेकिन आलम यह है कि एक प्रतिशत लोग भी इसके लिए आगे नहीं आ रहे हैं।

आलम यह है कि सरकार इन कालोनियों के संपत्ति मालिकों को इसके प्रोत्साहित करने के लिए बार- बार संशोधन करके प्रक्रिया सरल कर रही है बावजूद इसके लोग इसका लाभ लेने में रूचि नहीं दिखा रहे हैं।

इसलिए लोगों को रिझाने के लिए एमसीडी और डीडीए मालिकाना हक देने के लिए लगने वाले शुल्क में 75 प्रतिशत तक की कटौती की है। ऐसे में एमसीडी को एक बार फिर इसके लाभार्थियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद जागी है।

2019 में लागू हुई थी योजना

महापौर प्रवेश वाही ने बताया कि यूनिफाइड बिल्डिंग बायलाज (यूबीबीएल) के तहत लगने वाले शुल्क के साथ परमिट शुल्क, सुधार शुल्क और लैबर सेस लिया जाता है। इसी प्रकार एमसीडी मलबा निस्तारण के साथ, कंपलसेटरी रेगुलेटरी चार्ज, डेवलपमेंट चार्ज और आइटी व प्रशासनिक शुल्क देना पड़ता था।

जो कि न्यूनतम एक लाख से ज्यादा तक बैठता था। इसलिए एमसीडी और डीडीए ने मिलकर अपने लगने वाले शुल्क में 75 प्रतिशत तक की कटौती की है। जिसके बाद से एमसीडी को उम्मीद है कि लाभार्थियों की संख्या में इजाफा होगा। यह शुल्क 31 अक्टूबर तक आने वाले आवेदनकर्ताओं के लिए ही लागू होंगे।

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उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में पीएम उदय योजना लागू की गई थी। 2026 में केंद्र सरकार ने नियमों में संशोधन करके इसकी प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी एमसीडी को दे दी। पीएम उदय योजना तहत 37 हजार लोगों ने लाभ लिया था।

जबकि एमसीडी के पास आई योजना में मात्र दो ही लाभार्थी नए जुड़ पाएं हैं। कुल सात लोगों ने आवेदन किया था। इसमें से पांच आवेदन दस्तावेजों में कमी के कारण रद हो गए।

कई हैं चुनौतियां और व्यवहारिक बनाने की है जरुरत

दिल्ली नियमतीकरण नीति के तहत 1511 अनधिकृत कालोनियों के संपत्तियों को नियमतीकरण करके संपत्ति मालिकों को मालिकाना हक दिया जाना है लेकिन लोग इसलिए इसमें रूचि नहीं ले रहे हैं क्योंकि लोगों के अवैध निर्माण और अवैध कालोनियों को विशेष कानून के तहत दर्जा प्राप्त है।

ऐसे में जो लोग इस योजना के भागी नहीं बनेंगे तो उनकी संपत्ति पर कोई फर्क नहीं होगा। जबकि कराने वाले को शुल्क देना होगा। जबकि दिल्ली में तेजी से बढ़ रही आबादी में अब समस्या यह है कि एक ही संपत्ति बिल्डर फ्लैट सिस्टम के चलते चार से पांच संपत्ति मालिकों के नाम से हो गई है।

ऐसे में यह संपत्ति मालिक एकजुट नहीं होंगे जिसकी वजह से लोग इस योजना का लाभ नहीं ले पाएंगे।

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