सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, पीजी को पंजीकृत करना होगा अनिवार्य
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार छात्र आवासों के लिए एक नियामक ढांचा तैयार कर रही है। अब राजधानी ...और पढ़ें
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सत्य निकेतन हादसे के बाद एक्शन में दिल्ली सरकार।
HighLights
दिल्ली के सभी पीजी आवासों का अनिवार्य पंजीकरण होगा।
सुरक्षा जांच और भवन की मजबूती का केंद्रीय डेटाबेस बनेगा।
छात्रों की शिकायतों के लिए डिजिटल डैशबोर्ड तैयार होगा।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। सत्य निकेतन में पीजी भवन ढहने से पांच छात्रों समेत सात लोगों की मौत के बाद दिल्ली में छात्र आवासों को लेकर सरकार अब पंजीकरण से लेकर सुरक्षा जांच तक की पूरी व्यवस्था को एक नियामकीय ढांचे में लाने की तैयारी कर रही है।
राजधानी में चल रहे पीजी आवासों का अनिवार्य पंजीकरण होगा और उनकी सुरक्षा से जुड़ी जानकारी एक केंद्रीय डाटाबेस में दर्ज की जाएगी। इसके लिए 15 दिन के भीतर पीजी संचालकों के लिए अलग पोर्टल भी तैयार होगा। साथ ही पीजी सुरक्षित कैसे रहे, इसके लिए भवन की मजबूती और अग्नि सुरक्षा के उपायों को भी सुनिश्चित किया जाएगा।
आकलन करने के लिए भी अलग केंद्रीय पोर्टल बनाने का निर्णय
छात्र आवास और सुरक्षा के लिए गठित हाई पावर कमेटी की पहली बैठक के बाद लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि छात्रों की आवास जरूरत का आकलन करने के लिए भी अलग केंद्रीय पोर्टल बनाने का निर्णय लिया गया।
इस पोर्टल पर दिल्ली के सभी विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों के छात्रों का डाटा जुटाया जाएगा, जिससे यह पता लगाया जा सके कि राजधानी में छात्र आवास की कितनी कमी है।
उन्होंने बताया कि नए पोर्टल पर पीजी संचालकों को अपनी सुविधा का पंजीकरण कराने के साथ भवन की उम्र, संरचना का आकार और फायर सेफ्टी इंतजामों की जानकारी देनी होगी। इसके आधार पर संस्थागत और निजी पीजी आवासों का केंद्रीय डाटाबेस तैयार किया जाएगा।
सरकार पीजी में छात्रों की संख्या, भवन की क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित करने की दिशा में भी काम करेगी। इसका मकसद अनधिकृत या असुरक्षित छात्र आवासों की पहचान और नियमन को आसान बनाना है।
समाधान के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे
सूद ने कहा कि पीजी में रहने वाले छात्रों को समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार केंद्रीकृत डिजिटल शिकायत डैशबोर्ड तैयार करेगी। छात्र इसमें ओवरक्राउडिंग, भवन की सुरक्षा में खामी और लीज नियमों के उल्लंघन की शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इन शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जाएगी।
कमेटी पीजी के लीज एग्रीमेंट, मनमाने बिजली शुल्क और अलग-अलग क्षेत्रों में जोनवार किराया तय करने की संभावना की भी समीक्षा करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि कमेटी ने छात्र आवासों की संरचनात्मक और अग्नि सुरक्षा को भी प्रमुख एजेंडे में लेकर कार्य कर रही है। इसलिए पीजी के लिए अनिवार्य स्ट्रक्चरल ऑडिट और फायर सेफ्टी चेक, आपातकालीन निकासी प्रोटोकॉल और नियमित माक ड्रिल की व्यवस्था भी होगी।
पीजी संचालकों और छात्रों के लिए भी सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार
वहीं, पीजी संचालकों और छात्रों के लिए भी सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार किए जाएंगे। इसके लिए एक कानून भी बनाने का निर्णय हुआ है। उन्होंने बताया कि छात्रों की मांग और उपलब्धता की कमी को पूरा करने के लिए अलग-अलग विश्वविद्यालयों में क्षमता बढ़ाई जाएगी।
साथ ही डीडीए और अन्य एजेंसियों के खाली पड़े आवास को भी हॉस्टल में बदलने की संभावना तलाशी जाएगी। उल्लेखनीय है कि एलजी तरनजीत सिंह संधू ने सत्य निकेतन की घटना के बाद सूद की अध्यक्षता में एक 20 सदस्यीय हाई पावर कमेटी बनाई थी, जिसे 60 दिन में रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है।
