MCD में ACB का एक्शन, पेंशन फंड के लिए रिश्वत लेते क्लर्क गिरफ्तार; असिस्टेंट कमिश्नर पर भी शक
निगम के पूर्वी जोन कार्यालय से बिलिंग क्लर्क संजय को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। ...और पढ़ें

पेंशन फंड के लिए रिटायर्ड कर्मचारी से मांगी रिश्वत। फोटो: सांकेतिक
HighLights
निगम क्लर्क संजय 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार हुआ
सेवानिवृत्त कर्मचारी के पेंशन फंड के लिए 70 हजार रुपये मांगे थे
मामले में असिस्टेंट कमिश्नर से भी पूछताछ की जाएगी
जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। एमसीडी के पूर्वी जोन कार्यालय से गिरफ्तार किया गए बिलिंग क्लर्क संजय को भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने दस हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था।
एसीबी के अधिकारियों ने बताया कि निगम के पूर्व कर्मचारी सलेक चंद का पेंशन फंड रिलीज करने के नाम पर संजय 70 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा था। दस हजार की पहली किश्त देने के दौरान उसे दबोच लिया गया।
एक अन्य कर्मचारी को भी एसीबी ने हिरासत में लिया था लेकिन बाद में सलिप्तता न पाए जाने पर छोड़ दिया। मामले में पूर्वी जोन में तैनात रहे एक असिस्टेंट कमिश्नर व अन्य कर्मचारी से भी पूछताछ की जाएगी।
एसीबी के अधिकारियों ने बताया कि जितेंद्र नामक व्यक्ति ने शिकायत दी थी कि उनके पिता सलेक चंद निगम में सफाईकर्मचारी और तीस सितंबर 2024 को सेवानिवृत्त हो गए थे।
हालांकि लगभग दो साल बीतने के बाद भी उनका पेंशन फंड रिलीज नहीं किया जा रहा था। आरोप है कि संजय इसके लिए 70 हजार रुपये मांग रहा था।
शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले का सत्यापन कराया और पुलिसकर्मियों की टीम गठित की गई। सोमवार को शिकायतकर्ता को रिश्वत की रकम लेकर पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र स्थित एमसीडी के पूर्वी जोन कार्यालय परिसर में पहुंचने के लिए कहा गया।
आरोपित संजय ने शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपये लिए। इसी दौरान एसीबी की टीम ने उसे मौके पर दबोच लिया। एसीबी ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर संजय को गिरफ्तार कर लिया।
उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले में साकेत नाम के एक अन्य व्यक्ति की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
असिस्टेंट कमिश्नर से भी होगी पूछताछ
सूत्रों की मानें तो जितेंद्र ने मामले की शिकायत एक असिस्टेंट कमिश्नर से भी की थी। आरोप है कि शिकायत मिलने के बाद भी इसपर कार्रवाई नहीं की गई।
एसीबी को शक है कि मामले में उस असिस्टेंट कमिश्नर का भी हाथ हो सकता है, ऐसे में असिस्टेंट कमिश्नर से भी पूछताछ की जाएगी। इसके अलावा एक अन्य कर्मचारी से भी पूछताछ की जाएगी।
अपनों को भी नहीं बख्शते निगम के भ्रष्टाचारी
इस मामले के सामने आने के बाद एक बार फिर साफ हो गया है कि नगर निगम में भ्रष्टाचार इस कदर व्याप्त है कि निगम के कर्मचारी अपने विभाग के कर्मचारियों से भी रिश्वत वसूलने से नहीं चूकते।
जिस सफाईकर्मी ने पूरा जीवन निगम के अंतर्गत सेवा देते हुए बिता दिया उसका पेंशन फंड भी रिश्वत न देने के चलते दो साल तक अटकाए रखा गया।
सीएम रेखा गुप्ता भले ही भ्रष्टाचार पर नो टालरेंस की बात कहती हों लेकिन एमसीडी में व्याप्त भ्रष्टाचार को रोकना अधिकारियों और सरकार के लिए नामुमकिन सा बन गया है।
उधर, मामले में पूर्व मेयर श्याम सुंदर अग्रवाल ने बताया कि भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने वाले कर्मचारियों को तुरंत नौकरी से बर्खास्त करना चाहिए। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि रिश्वत मांगने पर सीबीआइ और एसीबी को शिकायत करें।
