UPI पर MDR शुल्क लगा तो ग्राहक की जेब पर पड़ेगा बोझ! कनॉट प्लेस-खान मार्केट में बढ़ी बेचैनी
दिल्ली के प्रसिद्ध बाजारों में यूपीआई पर एमडीआर शुल्क लगने की आशंका से चिंता बढ़ गई है, खासकर 2000 रुपये ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
दिल्ली के बाजारों में यूपीआई एमडीआर शुल्क की आशंका।
2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर शुल्क लगने का डर।
दुकानदार ग्राहकों पर शुल्क डालने या नकदी की वापसी की चिंता।
नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। यूपीआई पर एमडीआर शुल्क की आशंका से दिल्ली के प्रसिद्ध व लोकप्रिय बाजार सांसत में हैं। खासकर कनाट प्लेस व खान मार्केट जैसे वे बाजार जहां यूपीआइ भुगतान ट्रेंड में 50 से 60 प्रतिशत से अधिक का मामला 2,000 रुपये से अधिक का होता है।
दुकानदारों के अनुसार, यह क्रेडिट कार्ड के जमाने में लौटने जैसा होगा, जिसमें दुकानदार बिल बनाने से पहले ग्राहकों से पूछेंगे कि उन्हें भुगतान नकद करना या यूपीआइ से। अगर यूपीआइ से तो बिल में लगने वाला शुल्क भी जोड़ा जाएगा।
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर दिल्ली के थोक से लेकर खुदरा बाजारों में चर्चा और आशंका बढ़ गई है।
फिलहाल अनिश्चितता की स्थिति
ग्राहकों से लेकर दुकानदार इस बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल, अभी अनिश्चितता की स्थिति है। बहरहाल सरकार के नोटिफिकेशन में कहा गया है कि दो हजार तक के भुगतान पर कोई एमडीआर नहीं लगेगा।
जबकि, उससे अधिक के भुगतान को लेकर भी यही आश्वासन है, पर स्पष्टता नहीं है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि एमडीआर की सीमा तय कर सरकार ने दो हजार से अधिक के लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता साफ किया है।
कनाट प्लेस के दुकानदारों के संगठन नई दिल्ली ट्रेडर्स एसाेसिएशन (एनडीटीए) के महासचिव विक्रम बधवार ने कहा कि वर्ष 2020 से पहले तक आउटलेट्स में यह बातें खूब होती थी कि भुगतान नकद है कार्ड से।
कार्ड से होने पर बिल में एमडीआर जोड़ दिया जाता था। अब वह स्थिति फिर लौटने की आशंका है। चिंता कि बात यह कि इससे नगद भुगतान का मामला लौटेगा। क्योंकि, दुकानदार यह शुल्क खुद वहन नहीं करना चाहेंगे, क्योंकि उनका लाभ ही कुछ प्रतिशत का होता है।
वह आगे बताते हैं कि कनाट प्लेस के आउटलेट्स में यूपीआइ से दो हजार से अधिक भुगतान का मामला 50 प्रतिशत से भी अधिक का है। वह प्रभावित होने की आशंका है।
यहीं चिंता, खान मार्केट के दुकानदार जताते हैं, जहां के बारे में दावा है कि यूपीआइ भुगतान का मामल 80 प्रतिशत है, जिसमें से 55 प्रतिशत मामले दो हजार से अधिक के होते हैं। खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहरा ने कहा कि हम तो उम्मीद कार्ड भुगतान से शुल्क हटाने की कर रहे थे। अब यूपीआइ ही जद में है।
वह कहते हैं कि यूपीआइ सरकार की ब्रांडिंग और सफलता की कहानी है। जिसे अब कई देशों को जोड़ा जा रहा है। ऐसे में इसके रखरखाव व सुरक्षित रखने में करीब 20 हजार करोड़ का खर्च सरकार खुद वहन करें तो अच्छा रहेगा।
कपड़ा बाजार में भी चिंता
चांदनी चौक प्रसिद्ध कपड़ा बाजार से भी चिंता की लहर उठी है। क्लाथ मार्केट के प्रधान गोपाल गर्ग के अनुसार, थोक बाजारों में यूपीआइ के भुगतान अधिक होते हैं। इसलिए इसपर पुनर्विचार करना चाहिए।
चैंबर आफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआइ) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने विरोध की आवाज मुखर करते हुए कहा कि हम ऐसे किसी भी निर्णय का विरोध करते हैं। सरकार कह रही है कि शुल्क ग्राहक से नहीं दुकानदार से लिया जाएगा, लेकिन हकीकत ये है कि दुकानदार वही शुल्क घुमा-फिराकर ग्राहक से ही वसूलेगा।
2,000 रुपये का सामान खरीदने पर अगर दुकानदार को एक प्रतिशत भी एमडीआर देना पड़ा तो 20 रुपये का नुकसान होगा। वह या तो ग्राहक से लेगा या सामान महंगा करेगा।
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