दिल्ली के बाजारों में अतिक्रमण: कम जुर्माना, ज्यादा कमाई से नहीं रुक रहा अवैध कब्जा
दिल्ली के बाजारों में अतिक्रमण एक बड़ी समस्या बन गया है। नगर निगम द्वारा लगाए जाने वाले कम जुर्माने (₹4000 ...और पढ़ें

कृष्णा नगर स्थित लाल क्वाटर बाजार में दुकानों के आगे अतिक्रमण व लगता जाम। पारस कुमार
HighLights
कम जुर्माना, अधिक कमाई से अतिक्रमण जारी।
अतिक्रमण से ट्रैफिक जाम, पैदल यात्रियों को खतरा।
नियमों में सख्ती ही अतिक्रमण का समाधान।
सौरभ पांडे, ईस्ट दिल्ली। कहा जाता है कि कानून तोड़ने वाले कानून की कमियों का फायदा उठाते हैं। दिल्ली के अलग-अलग मार्केट में अतिक्रमण करने वाले कम से कम ऐसा करते तो दिखते ही हैं। ज़्यादातर मार्केट में दुकानों के बाहर फुटपाथ पर एक्स्ट्रा दुकानें लगी रहती हैं।
नगर निगम इन पर एक्शन लेता है, लेकिन कुछ ही घंटों में अतिक्रमण फिर से हो जाता है। इसकी वजह यह है कि अतिक्रमण करने वालों पर निगम का फाइन कम होता है, जबकि दुकानें लगाने वालों से रेवेन्यू ज़्यादा होता है। नतीजतन, फाइन लगने के बाद भी दुकानदार फिर से अतिक्रमण करने लगते हैं।
दिल्ली के ज़्यादातर बड़े मार्केट, जैसे गांधी नगर, लाल क्वार्टर, चांदनी चौक, सरोजिनी नगर, लाजपत नगर और सदर बाज़ार में अक्सर दुकानों के बाहर एक्स्ट्रा दुकानें लगी रहती हैं। दुकानदार फुटपाथ पर सामान बेचने वालों से रोज़ाना पांच से सात सौ रुपये किराया लेते हैं। इससे मार्केट की मेन सड़कों पर ट्रैफिक जाम हो जाता है। अतिक्रमण की वजह से पैदल चलने वालों को सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे एक्सीडेंट होते हैं।
कम जुर्माना, कमाई ज्यादा
MCD के नियमों के मुताबिक, फुटपाथ पर सामान बेचने वालों पर दो हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। निगम के नियमों के मुताबिक, यह जुर्माना हर 15 दिन में सिर्फ़ एक बार लगाया जाता है। इसका मतलब है कि एक दुकानदार पर महीने में दो बार कुल 4,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। दुकानदार हर महीने 15,000 से 21,000 रुपये तक वसूलते हैं। अगर उन्हें जुर्माना देना भी पड़े, तो वे आसानी से 12,000 और 15,000 रुपये कमा लेते हैं। नतीजतन, चालान कटने के बाद भी अतिक्रमण बना रहता है।
नियमों का फायदा उठा रहे लोग
पिछले शुक्रवार को निगम के शाहदरा साउथ ज़ोन की वार्ड कमेटी की मीटिंग में अतिक्रमण का मुद्दा ज़ोरदार तरीके से उठाया गया। रोहिणी ज़ोन और शाहदरा नॉर्थ ज़ोन समेत सभी ज़ोन के पार्षद अतिक्रमण की शिकायत करते हैं। शाहदरा साउथ ज़ोन के चेयरमैन रामकिशोर शर्मा ने कहा कि निगम में जुर्माना लगाने का मकसद लोगों को उनकी गलतियों का एहसास कराना है। इसलिए, हर महीने सिर्फ दो चालान काटे जाते हैं।
पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं जब एक ही आदमी के कई चालान काटे गए और सीनियर अधिकारियों को लगा कि दुकानदार को परेशान किया जा रहा है। इसलिए, दो चालान का नियम लागू है। अगर आप सामान ज़ब्त करने की कोशिश करते हैं, तो दुकानदार बाहर का सामान दुकान के अंदर ले आते हैं, जिससे ज़ब्त होने से बच जाता है।
नियम बदलने पर ही होगा सुधार
निगम की स्टैंडिंग कमेटी के पूर्व चेयरमैन बीबी त्यागी ने कहा कि अतिक्रमण दिल्ली के लिए एक समस्या बन गया है और इससे सख्ती से निपटना होगा। यह तभी हो सकता है जब निगम के नियम बदले जाएं। निगम को अतिक्रमण के खिलाफ अपने नियम सख्त करने होंगे, तभी लोगों को राहत मिलेगी।
