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क्या गांजा–भांग पर लगे कानूनों में दी जानी चाहिए ढील? दिल्ली HC का केंद्र को NDPS एक्ट की समीक्षा का निर्देश

Published: Wed, 04 Feb 2026 11:20 PM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को गांजा और भांग के उपयोग से जुड़े NDPS एक्ट के प्रावधानों की समीक्षा ...और पढ़ें

गांजा भांग को लेकर कानूनों की समीक्षा करने का निर्देश। फोटो: आर्काइव

गांजा भांग को लेकर कानूनों की समीक्षा करने का निर्देश। फोटो: आर्काइव

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। गांजा सहित भांग को मेडिकल, इंडस्ट्रियल, आर्थिक, इकोलाॅजिकल और दूसरे फायदों के लिए अपराध की श्रेणी से बाहर करने या उस पर लगी पाबंदियों में ढील की मांग से जुड़ी याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट अहम निर्देश दिए हैं।

अदालत ने केंद्र सरकार से यह समीक्षा करने को कहा कि क्या नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट और एनडीपीएस नियमों में गांजा या भांग के इस्तेमाल से जुड़े प्रविधानों में ढील देने की जरूरत है।

न्यायमूर्ति प्रतिबा एम सिंह व न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने अपराध की श्रेणी से बाहर करने पर कोई भी न्यायिक निर्देश जारी करने से इन्कार करते हुए कहा कि एनडीपीएस एक्ट और नियमों में ढील का सवाल पूरी तरह से कार्यपालिका और विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आता है।

याचिकाकर्ता ग्रेट लेजिस्लेशन मूवमेंट इंडिया ट्रस्ट ने तर्क दिया कि एनडीपीएस एक्ट के तहत मौजूदा कानूनी ढांचा भांग से जुड़े बढ़ते वैज्ञानिक रिसर्च, मेडिकल इस्तेमाल और ग्लोबल रेगुलेटरी ट्रेंड्स को ठीक से ध्यान में नहीं रखता है।

वहीं, दूसरी ओर, केंद्र ने कहा कि गांजा व भांग के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं है और एनडीपीएस एक्ट में मेडिकल और वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए भांग के इस्तेमाल की अनुमति देने के लिए पर्याप्त प्रावधान शामिल हैं।

सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि इस मामले में कई ऐसे पहलू हैं जिन पर विचार किया जाना चाहिए। ऐसे में अदालत ने केंद्र को इस मुद्दे की जांच करने का निर्देश देते हुए कहा कि प्रकरण में पेश किए गए तथ्यों व सरकार द्वारा दिए गए बयान से पता चलता है कि अगर गांजा के इस्तेमाल की अनुमति दी जाती है, तो यह कुछ औपचारिक नियमों के तहत होना चाहिए।

ऐसे में यह एक नीतिगत फैसला होगा और इस स्तर पर कोर्ट द्वारा फैसला करने का मुद्दा नहीं है। ऐसे में अदालत ने सहायता के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के डायरेक्टर को नोडल अधिकारी के तौर पर काम करने का निर्देश दिया।

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