दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में 650 करोड़ का घोटाला, जेम को बाईपास कर दिया गया राजीव रंगीला को ठेका
दिल्ली पुलिस की एसीबी ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में 650 करोड़ रुपये के दवा खरीद घोटाले में 12 ...और पढ़ें

सरकारी खरीद पोर्टल जेम को बाईपास कर राजीव रंगीला को दिया गया आपूर्ति का ठेका।
HighLights
12,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल, 650 करोड़ का घोटाला।
सरकारी खरीद पोर्टल जेम को दरकिनार कर दिया गया ठेका।
पूर्व सीपीए प्रमुख और डीजीएचएस समेत तीन गिरफ्तार।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में दवा, सर्जिकल सामान, कंज्यूमेबल्स और चिकित्सा उपकरणों की खरीद से जुड़े 650 करोड़ रुपये के घोटाले में दिल्ली पुलिस की एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने करीब 12 हजार पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की है।
मामले में सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) के तत्कालीन प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा तत्कालीन महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (डीजीएचएस) डॉ. वत्सला अग्रवाल और लेखा विभाग के अधिकारी नीरज चोपड़ा को गिरफ्तार किया जा चुका है। मुख्य आरोपित निजी आपूर्तिकर्ता राजीव रंगीला फरार है।
राउज एवेन्यू कोर्ट में विशेष न्यायाधीश विद्या प्रकाश की अदालत में मंगलवार को दाखिल चार्जशीट में आरोप है कि सरकारी खरीद के लिए निर्धारित गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) की प्रक्रिया को दरकिनार कर राजीव रंगीला की फर्म को आपूर्ति का ठेका दिया गया।
इतना ही नहीं भुगतान भी जेम को दरकिनार कर किया गया। जबकि नियमानुसार खरीद और भुगतान की प्रक्रिया जेम के माध्यम से आनलाइन होनी थी। चार्जशीट के अनुसार, लेखा विभाग के दो अधिकारियों ने इस तरह भुगतान करने पर आपत्ति जताई थी। इसके बावजूद लेखा विभाग के अधिकारी नीरज चोपड़ा ने भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
आपूर्ति का जरूरी सत्यापन और ऑडिट नहीं कराया
संबंधित खरीद में आपूर्ति का जरूरी सत्यापन और ऑडिट नहीं कराया गया। आरोप है कि इनवायस की प्रक्रिया भी नियमों के अनुसार पूरी नहीं की गई। इसके बावजूद भुगतान कर दिया गया। कोर्ट ने चार्जशीट दाखिल होने के बाद दस्तावेजों को सूची से मिलान का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।
बता दें कि मामले की जांच दिल्ली सरकार के सतर्कता विभाग की ओर से खरीद में संदिग्ध लेनदेन और प्रक्रिया में अनियमितताओं की जानकारी सामने आने के बाद शुरू हुई। इसके बाद एसीबी ने जांच अपने हाथ में ली। एसीबी ने 18 जून को सीपीए के तत्कालीन प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 27 जून को डीजीएचएस डॉ. वत्सला अग्रवाल और लेखा विभाग के अधिकारी नीरज चोपड़ा को गिरफ्तार किया गया।
डीजीएचएस रहते वत्सला को थी जानकारी
एसीबी के अनुसार डीजीएचएस रहते डॉ. वत्सला अग्रवाल को खरीद और भुगतान से जुड़ी अनियमितताओं की जानकारी थी। इसके बावजूद नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया और भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ने दी गई। जांच एजेंसी ने उनकी भूमिका को भी चार्जशीट में शामिल किया है।
रंगा के निजी सेफ में रखी थीं खरीद की फाइलें
सीपीए प्रमुख रहे डॉ. विनोद कुमार रंगा पर खरीद से संबंधित फाइलों को अपने निजी सेफ में रखवाने का आरोप है। जांच के दौरान खरीद से जुड़ी छह से सात महत्वपूर्ण फाइलें नहीं मिलीं। एसीबी ने इन फाइलों और उनके गायब होने की परिस्थितियों को भी जांच का हिस्सा बनाया है।
