IRCTC सिस्टम हैकिंग का आरोप, दिल्ली HC ने कहा- निजी विवाद में नहीं कर सकते रिट का इस्तेमाल
दिल्ली हाई कोर्ट ने IRCTC हैकिंग और साइबर आतंकवाद के आरोपों वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा ...और पढ़ें

पीठ ने कहा कि सिर्फ इसलिए कोर्ट के अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता क्योंकि वादी की शिकायत पर मनचाही कार्रवाई नहीं हुई है।
HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट ने निजी विवाद की याचिका खारिज की।
कोर्ट ने कहा रिट अधिकार क्षेत्र निजी मामलों के लिए नहीं।
याचिका में IRCTC हैकिंग, साइबर आतंकवाद के आरोप थे।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि रिट अधिकार क्षेत्र असाधारण प्रकृति का होता है और इसका इस्तेमाल निजी विवादों के लिए नहीं किया जा सकता है।
न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने एक निजी कंपनी के खिलाफ निजी विवाद को लेकर दायर रिट याचिका पर एक व्यक्ति को फटकार लगाते हुए यह टिप्पणी की।
पीठ ने कहा कि सिर्फ इसलिए कोर्ट के अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता क्योंकि वादी की शिकायत पर मनचाही कार्रवाई नहीं हुई है।
कंपनी के खिलाफ उचित कदम उठाने की छूट दी
पीठ ने इसके साथ ही याचिकाकर्ता की याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता ने एक कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का दावा था कि कंपनी आईआरसीटीसी सिस्टम की हैकिंग समेत कई राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल थी। हालांकि, पीठ ने कहा कि याचिका में कोई दम नहीं है और अदालत ने याचिकाकर्ता को कानून के मुताबिक कंपनी के खिलाफ उचित कदम उठाने की छूट दी।
साइबर आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियां शामिल
याचिकाकर्ता ने कहा कि वह एक प्राइवेट फर्म का कर्मचारी था और कुछ समय तक काम करने के बाद उसने नौकरी छोड़ दी थी। उसने दावा किया कि कंपनी कई देश-विरोधी गतिविधियों में शामिल थी।
उसने आरोप लगाया कि कंपनी आईआरसीटीसी सिस्टम की हैकिंग, धार्मिक समुदायों के बीच दंगे भड़काने के साथ ही साइबर आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियां शामिल थीं।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि कंपनी ने गुप्त स्रोतों से उसके गोपनीय ईमेल की कापी गलत तरीके से हासिल की और उसके खिलाफ अवमानना का मामला दर्ज करके उसे परेशान करने के लिए उनका गलत इस्तेमाल किया।
