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वकीलों के पैसे का कहां हुआ इस्तेमाल? अधिवक्ता कल्याण कोष पर दिल्ली HC ने केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब

Published: Fri, 11 Sep 2026 07:46 PM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने अधिवक्ताओं के कल्याण कोष में पारदर्शिता की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र और दिल्ली सरकार सहित अन्य से जवाब मांगा है।

दिल्ली हाई कोर्ट। फाइल फोटो

दिल्ली हाई कोर्ट। फाइल फोटो

HighLights

  1. कल्याण कोष में पारदर्शिता की मांग पर हाई कोर्ट ने जवाब मांगा।

  2. फर्स्ट जेनरेशन लायर्स एसोसिएशन ने जनहित याचिका दायर की है।

  3. आय-व्यय, ऑडिट और ऑनलाइन प्रणाली की जानकारी मांगी गई।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। अधिवक्ता कल्याण अनुदान अधिनियम- 2001 और दिल्ली अधिवक्ता कल्याण अनुदान नियम-2001 के तहत अधिवक्ताओं के कल्याण कोष में पारदर्शिता की मांग करने वाली जनहित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने जवाब मांगा है।

फर्स्ट जेनरेशन लायर्स एसोसिएशन की याचिका पर मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, बार काउंसिल ऑफ दिल्ली और एडवोकेट्स वेलफेयर फंड ट्रस्टी कमेटी को नोटिस जारी कर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

याचिका में आय, खर्च, खाते, ऑडिट और निवेश जैसी जानकारी को उचित ऑनलाइन व्यवस्था के माध्मय से उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

कैसे ऑनलाइन सिस्टम की याचिकाकर्ता ने की मांग?

याचिका में एक ऐसे ऑनलाइन सिस्टम की भी मांग की गई है जिससे वकील कल्याणकारी लाभ और आर्थिक मदद के लिए आवेदन कर सकें और अपने आवेदनों की स्थिति को ट्रैक कर सकें।

याचिका के अनुसार अधिवक्ता कल्याण अनुदान एक कानूनी फंड है और इसे वकीलों के कल्याण और फायदे के लिए बनाया गया है। यह भी कहा गया है कि अधिवक्ता, पंजीकरण के समय और अपनी प्रोफेशनल प्रैक्टिस के दौरान वेलफेयर फंड स्टैम्प के जरिए इसमें योगदान करते हैं।

याचिका का दावा है कि 2001-02 से 2020-21 के वित्तीय वर्षों के बीच, फंड की कुल आय लगभग 22.54 करोड़ रुपये थी। इसी दौरान, यह दावा किया गया है कि मेडिकल और अन्य लाभों तथा अनुग्रह राशि के तौर पर 7.13 करोड़ रुपये बांटे गए।

याचिका में यह भी कहा गया है कि वेलफेयर फंड में योगदान देने वाले वकीलों को फंड की वित्तीय स्थिति, उसके कामकाज और उन्हें मिलने वाले कल्याणकारी लाभों के बारे में जानने का उचित माध्यम मिलना चाहिए।