ऑनलाइन डायग्नोस्टिक सेवाओं पर हाईकोर्ट सख्त, दिल्ली सरकार से मांगा जवाब; 2020 के आदेश पर अमल नहीं
दिल्ली हाई कोर्ट ने ऑनलाइन डायग्नोस्टिक सेवाओं के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ...और पढ़ें

पीठ ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
HighLights
दिल्ली HC ने ऑनलाइन डायग्नोस्टिक सेवाओं पर जवाब मांगा।
सरकार पर 2020 के आदेशों का पालन न करने का आरोप।
अवैध ऑनलाइन लैब बिना पंजीकरण के चल रही हैं।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। ऑनलाइन तरीके से डायग्नोस्टिक सेवाएं प्रदान करने वालों के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। पूर्व में जारी अदालत के आदेशों का अनुपालन नहीं करने के खिलाफ दायर याचिका पर न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की पीठ ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले पर अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी।
याचिकाकर्ता रोहित जैन की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता शशांक देव सुधि ने पीठ के समक्ष कहा कि ऑनलाइन पैथ लैब संचालित करने वालों के विरुद्ध दिल्ली सरकार लगातार निष्क्रियता, उदासीनता और जानबूझकर कर अनदेखी कर रही है। यह भी कहा कि क्लिनिकल प्रतिष्ठान के रूप में पंजीकृत न होने के बावजूद भी दिल्ली में ऐसे लैब को काम करने और डायग्नोस्टिक सेवाएं प्रदान करने की अनुमति दी गई है।
अवैध ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवा एग्रीगेटर से संबंधित मुद्दे पर पहले भी अदालत ने छह अगस्त 2020 काे निर्णय पारित किया था। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि दिल्ली सरकार क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम-2010 और अन्य लागू वैधानिक प्रविधानों का स्पष्ट उल्लंघन करने वाले ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवा संस्थाओं के विरुद्ध कार्रवाई शुरू करे। हालांकि, उक्त पर अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया।
वहीं, दूसरी तरफ दिल्ली सरकार की तरफ से पेश हुए स्थायी अधिवक्ता समीर वशिष्ठ ने पीठ को सूचित किया कि एक समन्वय पीठ दिल्ली राज्य में पैथोलाजिकल लैब/क्लिनिकल प्रतिष्ठानों को विनियमित करने के लिए एक उचित वैधानिक तंत्र स्थापित करने के पहलू की जांच कर रही है। यह भी बताया कि दिल्ली सरकार उक्त उद्देश्य के लिए कानून बनाने की प्रक्रिया में है। दिल्ली सरकार के बयान को रिकार्ड पर लेते हुए अदालत ने इस संबंध में उठाए गए कदमों के संबंध में चार सप्ताह के अंदर हलफनामा दाखिल कर जवाब देने को कहा।
