17 साल पहले बनवाया था गर्लफ्रेंड के नाम का टैटू, होने वाली थी जेल; अब हाई कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला
दिल्ली हाई कोर्ट ने 2009 के अपहरण और दुष्कर्म मामले में दोषी की सजा कम कर दी, क्योंकि पीड़िता ने ...और पढ़ें

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट ने दुष्कर्म दोषी की सजा कम करने का फैसला किया।
पीड़िता ने अपने सीने पर दोषी के नाम का टैटू बनवाया था।
अदालत ने इसे सहमति का रिश्ता माना, उम्र के कारण अवैध।
विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। वर्ष 2009 में एक नाबालिग लड़की के अपहरण व दुष्कर्म के दोषी की सजा को दिल्ली हाई कोर्ट ने यह कहते हुए कम कर दिया कि लड़की ने अपने सीने पर अपीलकर्ता के नाम का टैटू बनवाया था।
न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव की पीठ ने कहा कि नाबालिग यह नहीं बता सकी कि उसने अपने सीने पर अपीलकर्ता के नाम का टैटू क्यों बनाया था।
वहीं, दोषी ने भी अपने हाथ पर नाबालिग के नाम का टैटू बनवाया था, लेकिन उसे सिर्फ लड़की की उम्र की वजह से दोषी ठहराया गया था।
अपीलकर्ता को वापस जेल भेजना न्याय का मजाक उड़ाने जैसा
पीठ ने कहा कि अपीलकर्ता और पीड़िता ने, अब अलग-अलग लोगों से शादी कर ली है और अपीलकर्ता का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और 17 वर्षों से चल रहे मामले में इस स्तर पर अपीलकर्ता को वापस जेल भेजना न्याय का मजाक उड़ाने जैसा होगा।
उक्त तथ्यों को देखते हुए अदालत ने अपीलकर्ता की मुख्य सजा को घटाकर पहले से जेल में काटी गई दो साल व चार महीने की काटी गई सजा मानते हुए रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, उस पर लगाए गए जुर्माना का भुगतान उसे करना होगा।
अदालत ने कहा कि स्थितियों व तथ्यों से पता चलता है कि दोनों के बीच सहमति का रिश्ता था। हालांकि लड़की की उम्र की वजह से इस रिश्ते को कानूनी मान्यता नहीं मिल सकती थी।
2009 में 14 साल की लड़की हुई थी गायब
अदालत ने मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि नाबालिग की मां की मौजूदगी में पुलिस ने बयान दर्ज किया था, जोकि दोषी के खिलाफ नहीं था। हालांकि, बाद में मजिस्ट्रेट के सामने और ट्रायल के दौरान दर्ज अपने बयान में उसने उस व्यक्ति पर आरोप लगाए थे।
याचिका के अनुसार जून 2009 में लगभग 14 साल की लड़की अपने घर से गायब हो गई थी। 18 वर्षीय दोषी अपीलकर्ता के साथ पहले वह कनॉट प्लेस और फिर मनाली गई थी। वे दो दिन बाद दिल्ली लौट आए।
अपीलकर्ता को 2011 में ट्रायल कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की धारा-363 (अपहरण), धारा-366 (शादी के लिए मजबूर करने के मकसद से महिला का अपहरण) और धारा-376 (दुष्कर्म) के तहत दोषी ठहराया गया था।
