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'पालतू कुत्ते सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य हैं', डॉग कस्टडी विवाद पर दिल्ली HC का ऐतिहासिक फैसला

Published: Wed, 01 Jul 2026 02:47 PM (GMT+05:30)Updated: Wed, 01 Jul 2026 03:35 PM (GMT+05:30)

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पालतू जानवर केवल संपत्ति नहीं बल्कि परिवार के सदस्य हैं। सुनवाई में अदालत ने भावनात्मक जुड़ाव को प्राथमिकता दी थी।

सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- ai generated

सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- ai generated

HighLights

  1. पालतू जानवर मात्र संपत्ति नहीं, परिवार के सदस्य।

  2. भावनात्मक जुड़ाव को प्राथमिकता, कल्याण पर जोर।

  3. तीन कुत्तों को गोद लेने वाले मालिकों को सौंपा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई में कहा था कि पालतू जानवरों को मात्र संपत्ति नहीं माना जा सकता। अदालत ने पालतू कुत्तों की कस्टडी विवाद में उनके कल्याण और भावनात्मक जुड़ाव को प्राथमिकता देते हुए तीन कुत्तों को उनके गोद लेने वाले मालिकों को वापस सौंपने का आदेश दिया था।

एनजीओ ने सौंपा था कुत्तों का जिम्मा

न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया की पीठ ने अप्रैल में ट्रायल कोर्ट के आदेश को संशोधित करते हुए यह फैसला सुनाया था। मामले में पुलिस ने क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत छापा मारा था, जहां कुत्तों को खराब हालत में पाया गया। बचाए गए तीन टॉय पमेरेनियन कुत्तों (मिष्टी, कोको और कॉटन) को एनजीओ के माध्यम से गोद लेने वालों को सौंपा गया था।

अदालत ने भावनात्मक आघात पर दिया जोर

कोर्ट ने कहा था कि जानवरों की कस्टडी को बेजान वस्तुओं की तरह नहीं देखा जा सकता। अदालत ने भावनात्मक बंधन और जानवरों को अलग करने से होने वाले भावनात्मक आघात पर जोर दिया था। दोनों पक्षों की सहमति के आधार पर कोर्ट ने कुत्तों को गोद लेने वाले मालिकों को सुपरदारी पर सौंपने का आदेश देते हुए 50 हजार रुपये का बांड जमा करने और मुकदमे के दौरान जरूरत पर पेश करने का निर्देश दिया था।

क्या था पूरा मामला?

मामला उस समय शुरू हुआ जब पुलिस ने एक परिसर में छापेमारी कर कुछ कुत्तों को खराब हालत में पाया और उन्हें बचाया। इसके बाद इन कुत्तों को एक एनजीओ को सौंप दिया गया, जिसने उनमें से तीन कुत्तों-मिश्टी, कोको और कॉटन-को याचिकाकर्ताओं को गोद दे दिया।

बाद में, तीसरे पक्ष ने खुद को कुत्तों का असली मालिक बताते हुए ट्रायल कोर्ट में सुपरदारी (अस्थायी कस्टडी) की मांग की। ट्रायल कोर्ट ने यह मांग स्वीकार कर ली और कुत्तों को उसे सौंपने का आदेश दिया। इसी आदेश को याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

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