डीपफेक तस्वीर केस में CJP के दीपके, दास और रांका से जवाब तलब; दिल्ली HC बोला- 'सिर्फ महिला का नहीं, देश के PM का है मामला'
दिल्ली HC ने PM मोदी के साथ डीपफेक तस्वीर पोस्ट करने का आरोप लगाने वाली महिला को दिल्ली पुलिस को ...और पढ़ें

सीजेपी नेता सौरव दास, अभिजीत दिपके और आशुतोष रांका समेत रत्ना सिंह पर मुकदमा शुरू हो चुका है। फाइल फोटो
HighLights
महिला को प्रधानमंत्री मोदी के डीपफेक तस्वीर मामले में सुरक्षा।
दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को सुरक्षा का निर्देश दिया।
सीजेपी नेताओं पर डीपफेक तस्वीर पोस्ट करने का आरोप।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खुद की डीपफेक अश्लील तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने का आरोप लगाने वाली महिला को दिल्ली पुलिस को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला केवल पीड़िता का ही नहीं, बल्कि देश के प्रधानमंत्री का भी है। याचिका पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने आरोपी नेताओं को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सीजेपी नेताओं पर डीपफेक और चरित्र हनन का आरोप
पीड़िता का आरोप है कि काॅकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरव दास, अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह ने बिना अनुमति उनकी निजी तस्वीर का इस्तेमाल किया। उन्होंने एआई (एआई) टूल और डीपफेक टेक्नोलॉजी के जरिए उनके चेहरे को भारत के प्रधानमंत्री के साथ एक अश्लील और आपत्तिजनक तस्वीर में बदला और उसे सोशल मीडिया पर शेयर किया। याचिका में कहा गया है कि आरोपियों ने इस फर्जी तस्वीर के बैनर छपवाकर भारी भीड़ के बीच घुमाए और अपमानजनक नारे लगाए।
धमकियों का सामना और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
महिला के वकील उमेश शर्मा ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है और आपत्तिजनक सामग्री को इंटरनेट से नहीं हटाया गया है। पीड़िता का कहना है कि ऑनलाइन मौजूद इस सामग्री के कारण उन्हें लगातार जान से मारने, दुष्कर्म की धमकियों और गंभीर मानसिक सदमे का सामना करना पड़ रहा है। वकील ने कहा कि दिल्ली पुलिस की क्विक रिएक्शन टीम को इसका खुद संज्ञान लेना चाहिए था।
कोर्ट का रुख और सामग्री हटाने की प्रक्रिया
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट से सामग्री हटाने का मामला सिविल अधिकार क्षेत्र वाली बेंच के पास जाना चाहिए, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से कोर्ट अभी पुलिस सुरक्षा का निर्देश दे रही है। पुलिस की संवेदनहीनता पर मौखिक रूप से सख्त टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा कि अगर पुलिस संवेदनशील नहीं है, तो वह सुनिश्चित करेंगे कि पुलिस इस मामले में संवेदनशील बने।
