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सेंट स्टीफेंस कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती प्रक्रिया पर दिल्ली हाई कोर्ट ने लगाई रोक

Published: Sat, 16 May 2026 12:39 AM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने सेंट स्टीफेंस कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। यह रोक ...और पढ़ें

दिल्ली हाई कोर्ट ने सेंट स्टीफेंस कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी।

दिल्ली हाई कोर्ट ने सेंट स्टीफेंस कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी।

HighLights

  1. दिल्ली हाई कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया पर लगाई रोक।

  2. तदर्थ असिस्टेंट प्रोफेसरों की याचिका पर आया फैसला।

  3. चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं, भेदभाव के आरोप लगे।

विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। प्रतिष्ठित सेंट स्टीफेंस कॉलेज की भर्ती प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। एक दिन पहले ही डीयू रजिस्ट्रार ने चयन समिति पर सवाल उठाते हुए कॉलेज में नवनियुक्त प्राचार्य प्रो. सुसान एलियास की नियुक्ति पर रोक लगा दी थी और अब शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने कालेज द्वारा की गई कई असिस्टेंट प्रोफेसरों की हालिया भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।

विभिन्न विभागों में एड-हॉक (तदर्थ) के तौर पर असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर काम करने वाले शिक्षकों की याचिका पर राहत देते हुए हाई कोर्ट ने इस भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाई। साथ ही न्यायमूर्ति संजीव नरुला की पीठ ने कहा कि अगली सुनवाई की तारीख तक याचिकाकर्ता छह एड-हाक असिस्टेंट प्रोफेसरों की सेवाएं समाप्त करने पर रोक लगाई जाती है।

साथ ही यह भी निर्देश दिया कि असिस्टेंट प्रोफसर की नियुक्ति के संबंध में चयन समिति की रिपोर्ट/सिफारिशों को अदालत की अनुमति के बिना लागू नहीं किया जाएगा। पीठ ने डीयू व सेंट स्टीफेंस सहित अन्य को नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले में अगली सुनवाई पांच अक्टूबर को होगी।

अदालत ने रिकॉर्ड पर लिया कि याचिकाकर्ता असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति डीयू द्वारा 2018-21 के वर्षों के लिए तय की गई प्रक्रिया के तहत की गई थी। शिक्षकों ने याचिका में कहा कि कार्यकाल पूरा होने से कुछ सप्ताह पहले ये नियुक्तियां प्रिंसिपल जान वर्गीस ने की थी।

वेतन तय करने व वरिष्ठता देने सहित अन्य लाभ देने की मांग

याचिका में आरोप लगाया कि नियुक्तियों में एक विशेष समुदाय को तरजीह देकर उनके साथ भेदभाव किया गया। याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश हुईं अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने नियमित करने, वेतन तय करने व वरिष्ठता देने सहित अन्य लाभ देने की मांग की है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि चयन पूरी तरह से इंटरव्यू में उनके प्रदर्शन के आधार पर किया गया था और कालेज ने डीयू द्वारा तय किए गए शार्टलिस्टिंग मानदंडों के विपरीत, हर रिक्ति के लिए लगभग सत्तर उम्मीदवारों को शार्टलिस्ट किया था। यह भी तर्क दिया कि इस प्रक्रिया से कट-आफ के मानक नीचे गिर जाते हैं, ताकि कम अकादमिक, बिना शिक्षण अनुभव वाले उम्मीदवारों को जगह दी जा सके। ऐसा करके याचिककार्ताओं को उनकी उच्च अकादमिक योग्यता, लंबे शिक्षण अनुभव और कई वर्षों से कालेज के साथ लगातार जुड़े रहने के बावजूद, चयन प्रक्रिया में निष्पक्ष अवसर से वंचित किया जा रहा है।

गलत शार्टलिस्टिंग मानदंडों को देखते हुए भर्ती प्रक्रिया को आगे न बढ़ाया जाए

वहीं, दूसरी तरफ डीयू की तरफ से पेश हुए मोहिंदर जे.एस. रूपल ने अदालत को बताया कि सेंट स्टीफेंस कॉलेज द्वारा अपनाई गई भर्ती प्रक्रिया, यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल द्वारा निर्धारित शार्टलिस्टिंग के दिशा-निर्देशों के विपरीत है। उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय ने कालेज को पहले ही पत्र लिखकर सलाह दी है कि गलत शार्टलिस्टिंग मानदंडों को देखते हुए भर्ती प्रक्रिया को आगे न बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद, कॉलेज ने भर्ती प्रक्रिया जारी रखी।

उल्लेखनीय है कि बृहस्पतिवार को ही डीयू रजिस्ट्रार ने सेंट स्टीफेंस कॉलेज में नवनियुक्त प्राचार्य प्रो. सुसान एलियास की नियुक्ति पर रोक लगा दी है। उन्होंने कॉलेज की गवर्निंग बॉडी को पत्र लिखकर नियुक्ति प्रक्रिया पर आपत्ति जताई और कहा कि चयन समिति का गठन यूजीसी रेगुलेशन 2018 के अनुरूप नहीं किया गया।

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