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127 करोड़ एक्सटॉर्शन केस: दिल्ली हाई कोर्ट से सुकेश चंद्रशेखर के चार सहयोगियों को मिली जमानत

Published: Wed, 08 Jul 2026 06:24 PM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने 217 करोड़ रुपये के रंगदारी मामले में ठग सुकेश चंद्रशेखर के चार सहयोगियों अरुण मुथु, बी ...और पढ़ें

रंगदारी मामले में सुकेश चंद्रशेखर के सहयोगी अरुण मुथु, बी मोहनराज, सुधीर और कमलेश कोठारी को जमानत मिल गई।

रंगदारी मामले में सुकेश चंद्रशेखर के सहयोगी अरुण मुथु, बी मोहनराज, सुधीर और कमलेश कोठारी को जमानत मिल गई।

HighLights

  1. दिल्ली हाई कोर्ट ने चार सहयोगियों को जमानत दी।

  2. लंबे समय से जेल और मुकदमे की जटिलता आधार।

  3. लीना पालोस की जमानत याचिका पहले ही खारिज।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े 217 करोड़ रुपये की रंगदारी मामले में आरोपित अरुण मुथु, बी मोहनराज, सुधीर और कमलेश कोठारी को जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि चारों लंबे समय से जेल में हैं और 24 आरोपितों व 403 गवाहों वाले इस जटिल मामले में मुकदमे के जल्द पूरा होने की संभावना नहीं है।

न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने कहा कि अभियोजन के अनुसार अरुण मुथु ने रंगदारी की वारदात में सीधे तौर पर हिस्सा नहीं लिया था। उस पर सुकेश चंद्रशेखर और लीना पालोस के लिए अपराध से अर्जित धन के प्रबंधन, संपत्तियां और लग्जरी कारें खरीदने, वित्तीय लेनदेन कराने, लीना की फर्म के लिए बैंकिंग एंट्री कराने व वेब सीरीज के निर्माण में मदद करने के आरोप हैं। अभियोजन के अनुसार वह इन कार्यों के बदले 2.5 प्रतिशत कमीशन प्राप्त करता था।

मुथु की भूमिका धन के प्रबंधन को लेकर स्पष्ट नहीं

अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड में ऐसा कोई आधार नहीं है जिससे मुथु की भूमिका धन के प्रबंधन से अधिक दिखाई दे। ऐसे में लंबे समय से हिरासत, मुकदमे की जटिलता और उसके जल्द समाप्त होने की संभावना न होने को देखते हुए जमानत दी जाती है।

टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निस्तारण तक सीमित

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निस्तारण तक सीमित हैं और इनका मुकदमे के गुण-दोष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।इसी आधार पर अदालत ने सह-आरोपित बी मोहनराज, सुधीर और कमलेश कोठारी को भी जमानत दे दी।

हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि लीना पालोस का मामला अलग है। मई में उसकी जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी गई थी कि प्रथम दृष्टया वह संगठित अपराध सिंडिकेट के केंद्र में थी, इसलिए उसका मामला अन्य आरोपितों से भिन्न है।

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