दिल्ली सरकार बेचेगी कार्बन क्रेडिट, हर साल करोड़ों कमाने का प्लान; पर्यावरण सुधार से होगी बंपर कमाई
दिल्ली सरकार अब पर्यावरण सुधार के कार्यों से आय अर्जित करने की तैयारी में है, जिसके तहत इलेक्ट्रिक बसों, पौधारोपण ...और पढ़ें

दिल्ली सरकार ने कार्बन क्रेडिट से कमाई का प्लान बनाया। फोटो: एआई
HighLights
दिल्ली सरकार पर्यावरण सुधार से आय अर्जित करेगी
कार्बन उत्सर्जन में कमी को कार्बन क्रेडिट में बदलेगी
इलेक्ट्रिक बसें, पौधारोपण, कचरा प्रबंधन प्रमुख परियोजनाएं
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली सरकार अब पर्यावरण सुधार के कामों को आय का जरिया बनाने की तैयारी कर रही है। उम्मीद की जा रही है कि इससे सरकार को करोड़ों की कमाई होगी।
सरकार इलेक्ट्रिक बसों, पौधारोपण, कचरा प्रबंधन, अक्षय ऊर्जा और ऊर्जा बचत जैसे प्राेजेक्ट से होने वाली कार्बन उत्सर्जन में कमी को कार्बन क्रेडिट में बदलकर बाजार में बेच सकेगी। इससे सरकार को इन पर्यावरणीय कामों के बदले अतिरिक्त आय मिलने की उम्मीद है।
पर्यावरण विभाग ने इसके लिए तीन सलाहकार एजेंसियों को सूचीबद्ध करने के लिए निविदा जारी की है। ये एजेंसियां पहले यह पता लगाएंगी कि दिल्ली सरकार की कौन-कौन सी परियोजनाओं से कितने कार्बन उत्सर्जन में कमी हुई है।
इसके बाद उसका वैज्ञानिक तरीके से हिसाब तैयार किया जाएगा और मान्यता प्राप्त संस्थाओं से उसका सत्यापन कराया जाएगा। सत्यापन के बाद पात्र परियोजनाओं के लिए कार्बन क्रेडिट जारी होंगे।
इन्हें कार्बन बाजार में खरीदारों को बेचा जा सकेगा। इनकी बिक्री से मिलने वाली रकम दिल्ली सरकार के समेकित कोष या सरकार द्वारा तय खाते में जमा होगी।

दिल्ली में कितना फायदा संभव
निविदा दस्तावेज में दिए गए प्रारंभिक आकलन के मुताबिक दिल्ली मध्यम अवधि में हर साल करीब 2.5 से 3 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन में कमी हासिल कर सकती है।
हालांकि सरकार ने इसे प्रारंभिक और संकेतात्मक अनुमान बताया है। वास्तविक कार्बन क्रेडिट परियोजना की प्रकृति, उत्सर्जन में वास्तविक कमी और मान्यता प्राप्त मानकों के आधार पर तय होंगे।
सरकार का कहना है कि दिल्ली में अभी अलग-अलग परियोजनाओं से होने वाली कार्बन उत्सर्जन में कमी का व्यवस्थित हिसाब, उसकी निगरानी और उसे बाजार से जोड़ने की व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं है। नई व्यवस्था का उद्देश्य इसी प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है।
जनवरी में दिल्ली कैबिनेट ने कार्बन क्रेडिट से आय अर्जित करने के लिए रूपरेखा को मंजूरी दी थी। चुनी जाने वाली एजेंसियों का पैनल तीन साल के लिए होगा। निविदा जमा करने की अंतिम तारीख आरएफपी जारी होने के चार सप्ताह बाद है और प्री-बिड बैठक 30 सितंबर को होगी।

कार्बन क्रेडिट क्या है और दिल्ली इसे कैसे बेचेगी?
सामान्य तौर पर एक कार्बन क्रेडिट एक टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन में कमी या उसे रोकने से जुड़ा प्रमाणित क्रेडिट होता है। दिल्ली सरकार की किसी परियोजना से पहले की तुलना में कितना उत्सर्जन कम हुआ, इसका वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा।
चुनी गई एजेंसी परियोजना का दस्तावेज तैयार करेगी और मान्यता प्राप्त कार्बन मानकों के तहत उसका सत्यापन कराया जाएगा। इलेक्ट्रिक बसें, पौधारोपण, कचरा प्रबंधन, अक्षय ऊर्जा, ऊर्जा बचत और टिकाऊ परिवहन जैसी परियोजनाएं संभावित रूप से इसमें शामिल हो सकती हैं।
सत्यापन और प्रमाणन के बाद जारी क्रेडिट को कार्बन बाजार में खरीदारों को बेचा जा सकेगा। बिक्री से मिलने वाली रकम दिल्ली सरकार के समेकित कोष या सरकार द्वारा तय खाते में जमा होगी। पर्यावरण सुधार की परियोजनाओं से उत्सर्जन कम करने के साथ अतिरिक्त राजस्व जुटाने का रास्ता बनेगा।
