ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण के लिए दिल्ली सरकार देगी 2 करोड़ तक की मदद, NGO-ट्रस्ट भी कर सकेंगे आवेदन
दिल्ली सरकार ने ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण और विकास के लिए 'दिल्ली मुख्यमंत्री विरासत नवोथान योजना' के तहत अनुदान योजना ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
दिल्ली सरकार ने स्मारकों के संरक्षण हेतु अनुदान योजना शुरू की।
गैर-सरकारी संगठनों को दो करोड़ रुपये तक की सहायता मिलेगी।
योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन कर वित्तीय सहायता प्राप्त करें।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण, जीर्णोद्धार और विकास के लिए सरकार विभिन्न संगठनों को अनुदान देगी। अब गैर सरकारी संगठनों, न्यास, फाउंडेशन, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य पात्र संस्थाओं को वित्तीय सहायता मिल सकेगीद्ध दिल्ली सरकार ने ‘दिल्ली मुख्यमंत्री विरासत नवोथान योजना’ के तहत स्मारकों के संरक्षण के लिए सहायता अनुदान योजना की अधिसूचना जारी कर दी है।
अनुदान योजना के तहत किसी परियोजना के लिए अधिकतम दो करोड़ रुपये प्रति वित्तीय वर्ष तक सहायता दी जा सकेगी। सामान्य परियोजनाओं में विभाग और संस्था के बीच खर्च का अनुपात 75:25 रहेगा। महत्वपूर्ण स्मारकों से जुड़े कार्यों में सरकार 90 प्रतिशत और संबंधित संस्था 10 प्रतिशत खर्च वहन करेगी। वहीं सरकारी संस्थानों की परियोजनाओं का 100 प्रतिशत खर्च विभाग उठाएगा।
करना होगा ऑनलाइन आवेदन
योजना में यह भी प्रविधान है कि संरक्षण कार्य की आवश्यकता को देखते हुए दो करोड़ रुपये की अधिकतम सीमा को सिफारिश समिति की अनुशंसा पर बढ़ाया जा सकता है। इसका आधार यह होगा कि अलग-अलग स्मारकों की संरक्षण संबंधी जरूरत और अनुमानित लागत एक जैसी नहीं होती। एक स्वैच्छिक संगठन एक वित्तीय वर्ष में केवल एक परियोजना के लिए आवेदन कर सकेगा।
वित्तीय सहायता के लिए पात्र संस्था को दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग के निदेशक के नाम से जारी पोर्टल के माध्यम से आनलाइन आवेदन करना होगा। विश्वविद्यालय और सरकारी अथवा स्वायत्त संस्थाएं रजिस्ट्रार या विभागाध्यक्ष के माध्यम से आवेदन कर सकेंगी। निर्धारित समय के बाद प्राप्त या अधूरे आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।
देनी होगी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट
आवेदन के साथ विस्तृत परियोजना रिपोर्ट देनी होगी। इसमें प्रस्तावित कार्य, वित्तीय सहायता की जरूरत और परियोजना में नियुक्त या नियुक्त किए जाने वाले विशेषज्ञों की योग्यता एवं अनुभव का विवरण देना होगा। इसके अलावा आवेदक एजेंसी को संक्षिप्त अवधारणा योजना भी प्रस्तुत करनी होगी।
योजना में भारत सरकार के दर्पण पोर्टल पर संबंधित स्वैच्छिक संगठन, न्यास, फाउंडेशन और शैक्षणिक संस्थान का पंजीकरण भी अनिवार्य किया गया है।
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