लाखों में बिक रहीं सरकारी अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टरों की सीटें! दिल्ली में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर
दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टरों की सीटें लाखों रुपये में बेचे जाने का आरोप लगा है। इंडियन मेडिकल ...और पढ़ें
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आईएमए जूनियर्स डॉक्टर नेटवर्क के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. ध्रुव चौहान ने सीबीआई जांच मांग की। AI जनरेटेड
HighLights
दिल्ली सरकारी अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टर सीटें बेचने का गंभीर आरोप।
वॉट्सएप चैट से लाखों रुपये में सीटों की बिक्री का खुलासा।
मामले की सीबीआई और आयकर विभाग से जांच की मांग।
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टरों की सीटें लाखों रुपये में बेचे जाने का आरोप लगा है।
सोशल मीडिया पर वॉट्सएप ग्रुप की बातचीत के स्क्रीनशॉट सामने आने के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के जूनियर डॉक्टर्स नेटवर्क के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. ध्रुव चौहान ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज सिंह को पत्र भेजकर मामले की जांच सीबीआई और आयकर विभाग से कराने की मांग की है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में इंदिरा गांधी अस्पताल (आईजीएच) के लिए 1.60 लाख और नरेला के लिए 1.30 लाख रुपये रेट बताए जाने का दावा किया गया है।
वॉट्सएप ग्रुप में अस्पताल के नाम से रेट
चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े सोशल मीडिया खाते "@medicodoi" ने शनिवार को एक वीडियो साझा किया। इसमें 'दिल्ली गवर्नमेंट मेडिकल जाब्स' और 'दिल्ली गवर्नमेंट जेआरशिप अपडेट्स' नाम वाले वाट्सएप ग्रुप की बातचीत के स्क्रीनशाट दिखाए गए हैं।
इनमें लोग आईजीएच और नरेला में रेजिडेंट डॉक्टर की सीट के रेट को लेकर पूछताछ का ब्यौरा है। इस पूछताछ के जवाब में दोनों अस्पतालों के लिए अलग-अलग रकम बताए जाने का दावा किया है।
आधा पैसा पहले, बाकी नियुक्ति के बाद
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखाई गई बातचीत के अनुसार, आधी रकम पहले और बाकी नियुक्ति मिलने के बाद देने की बात कही गई है। एक संदेश में नकद भुगतान को बेहतर बताया गया है, जबकि आनलाइन भुगतान का विकल्प भी दिया गया है।
भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल
आईएमए जूनियर्स डॉक्टर नेटवर्क के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. ध्रुव चौहान ने आरोप लगाया है कि पैसे लेकर सरकारी पदों पर इस तरह से नियुक्ति होने से योग्य उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।
मांग की है कि मामले की जांच के लिए वॉट्सएप ग्रुप के संचालक और सदस्यों की पहचान, भुगतान के साक्ष्य और अस्पतालों की भर्ती सूची का मिलान जरूरी है।
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