नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा द्वारा मांगों को पूरी करने का आश्वासन मिलने के बाद सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का विरोध कर रहे रेजिडेंट डॉक्टरों ने आज से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल वापस ले ली है।

दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठन फोर्डा (फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन) के अध्यक्ष डॉ. पंकज सोलंकी ने इसकी घोषणा करने के साथ ही बताया कि यदि उनकी मांगों को लेकर सरकार से सकारात्मक संकेत नहीं मिला तो आठ जून से अस्पतालों में अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।

डॉक्टर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर बेहद नाखुश हैं। उनका कहना है कि अब तक डॉक्टरों को 25 फीसद गैर प्रैक्टिस भत्ता (एनपीए) मिलता है। यह मूल वेतनमान में जुड़ा होता है।

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों में एनपीए को घटाकर 20 फीसद करने और इसे मूल वेतनमान से अलग करने का प्रस्ताव किया गया है। इसके अलावा एनपीए पर आवासीय भत्ता देने के प्रावधान को भी हटाने का प्रस्ताव किया गया है। इससे डॉक्टर ज्यादा नाराज हैं।

वे एनपीए को बढ़ाने व उसे मूल वेतनमान में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही रात्रिकालीन भत्ता, अतिरिक्त ड्यूटी भत्ता सहित कई अन्य सुविधाओं को लेकर मांगें भी डॉक्टरों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रलय के समक्ष रखी है।

इन्हीं मांगों को लेकर रेजिडेंट डॉक्टरों ने 26 मई को सभी सरकारी अस्पतालों में हड़ताल की थी। इस दौरान मरीजों को काफी परेशानी हुई थी और एक मरीज की मौत भी हो गई थी। 1इसके अलावा रेजिडेंट डॉक्टरों ने एक जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की थी।

इसके बाद जेपी नड्डा ने फोर्डा के पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी और उनकी मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया था। डॉ. पंकज सोलंकी ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री की बातों पर हमें भरोसा है और उम्मीद है कि आश्वासन पूरा करेंगे। यदि सरकार ने सात जून तक मांगों के संदर्भ में सकारात्मक फैसला नहीं किया तो डॉक्टर आठ जून से हड़ताल करने को विवश होंगे।

Posted By: JP Yadav

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