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दिल्ली में मॉडर्न हुए गणपति: बाल गणेश और नया अंदाज पहली पसंद, कारीगरों पर रोजी-रोटी का संकट

Published: Sat, 12 Sep 2026 02:14 PM (IST)

भक्तों की बदलती पसंद के साथ दिल्ली में गणेश प्रतिमाओं के रूप भी आधुनिक हो रहे हैं, जहां कारीगर बाल गणेश और विभिन्न मुद्राओं वाली प्रतिमाएं बना रहे हैं।

गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य में झंडेवालान मेट्रो स्टेशन के पास गणेश जी की मूर्तियों की सजावट करती कारीगर। हरीश कुमार

गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य में झंडेवालान मेट्रो स्टेशन के पास गणेश जी की मूर्तियों की सजावट करती कारीगर। हरीश कुमार

HighLights

  1. दिल्ली में गणेश उत्सव के लिए आधुनिक गणपति प्रतिमाएं तैयार।

  2. कारीगर बाल गणेश और सिंहासन पर विराजमान गणपति बना रहे।

  3. पुलिस द्वारा दुकानें हटाने से कारीगरों को आर्थिक चिंता।

शशि ठाकुर, नई दिल्ली। गणेश उत्सव की आहट के साथ दिल्ली में करोल बाग और राजेंद्र नगर के बीच झंडेवालान मंदिर के नजदीक फुटपाथ पर सजे गणपति प्रतिमाओं के बाजार में माटी को आकार देने की रफ्तार बढ़ गई है।

कहीं कारीगर मिट्टी को गूंथकर प्रतिमा का ढांचा तैयार कर रहे हैं तो कहीं चेहरे की भाव-भंगिमा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। भक्तों की बदलती पसंद ने इस बार गणपति के रूप भी बदल दिए हैं।

प्रतिमाओं को तैयार कर रहे कारीगर

पारंपरिक प्रतिमाओं के साथ बाल गणेश, सिंहासन पर विराजमान गणपति और अलग-अलग मुद्राओं वाली प्रतिमाओं की मांग बढ़ी है। कारीगर करीब 15 दिन से लेकर एक माह की लगातार मेहनत के बाद इन प्रतिमाओं को तैयार कर रहे हैं।

राजस्थान से आए श्रवण कुमार पिछले 25 वर्षों से गणपति प्रतिमा बना रहे है। उनका कहना है कि यह काम सिर्फ रोजी- रोटी का जरिया नहीं, बल्कि परिवार की पीढ़ियों से चली आ रही विरासत है।

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मिट्टी को गढ़ने का हुनर उन्होंने बचपन में अपने पिता के साथ काम करते हुए सीखा। अब परिवार की तीसरी पीढ़ी इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है।

घंटों करनी पड़ती है मेहनत 

श्रवण बताते हैं कि प्रतिमा तैयार करना सिर्फ मिट्टी का ढांचा खड़ा करना नहीं है। इसमें चेहरे की बारीकियां, आंखों की बनावट, हाथ-पैर की मुद्रा, रंग और आभूषण तक हर हिस्से पर घंटों मेहनत करनी पड़ती है। एक छोटी सी गलती भी पूरी प्रतिमा के भाव को बदल सकती है।

गणपति की प्रतिमाएं तैयार करने के लिए राजस्थान, मुंबई- महाराष्ट्र और कोलकाता से भी कारीगर दिल्ली पहुंचे हैं। बाजार में सुबह से देर रात तक इनके हाथ मिट्टी को गणपति का आकार देने में जुटे हैं।

मौसम की परवाह किए बिना कारीगर प्रतिमाओं को तैयार कर रहे हैं, ताकि उत्सव से पहले भक्तों की मांग पूरी की जा सके। छह से आठ फीट तक की प्रतिमाएं करीब 25 से 30 हजार रुपये में उपलब्ध हैं। हालांकि, प्रतिमाएं तैयार कर रहे कारीगरों की चिंता भी बढ़ गई है।

कारीगरों ने जिस जगह अस्थायी दुकानें और बिक्री स्थल बनाए हैं, उन्हें पुलिस की ओर से हटाने के लिए कहा गया है।

प्रतिमाओं को कहां रखा जाएगा

ऐसे में कारीगरों को डर है कि अगर दुकानें हटानी पड़ीं तो तैयार प्रतिमाओं को कहां रखा जाएगा और बिक्री कैसे होगी। कई कारीगर दूसरे राज्यों से यहां आकर करीब 15 दिन से मेहनत कर रहे हैं, ऐसे में दुकान हटने की आशंका उनके लिए आर्थिक परेशानी भी खड़ी कर रही है।

इस बार प्रतिमाओं में परंपरा के साथ आधुनिकता की झलक भी देखने को मिल रही है। बच्चों के बीच लोकप्रिय बाल गणेश के अलग-अलग रूप बनाए जा रहे हैं। वहीं सिंहासन और कार पर विराजमान गणपति और विभिन्न मुद्राओं वाली प्रतिमाओं को भी खास तौर पर तैयार किया जा रहा है।

कारीगरों का कहना है कि अब लोग केवल बड़ी प्रतिमा नहीं, बल्कि चेहरे की भाव-भंगिमा और डिजाइन में अलगपन भी देख रहे हैं। इसी बदलती मांग के साथ मिट्टी में भी गणपति के नए रूप उतर रहे हैं।