रिश्वतखोरी मामले में डिप्टी कमिश्नर और बिचौलिया सीबीआई हिरासत में, दिल्ली में भ्रष्टाचार पर शिकंजा
राउज एवेन्यू कोर्ट ने रिश्वत मामले में डिप्टी कमिश्नर अभिषेक कुमार मिश्रा और बिचौलिए देवांशू गौतम को एक दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा है।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने रिश्वत मामले में डिप्टी कमिश्नर अभिषेक कुमार मिश्रा और बिचौलिए देवांशू गौतम को एक दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा है।
HighLights
डिप्टी कमिश्नर अभिषेक मिश्रा एक दिन की सीबीआई हिरासत में।
बिचौलिए देवांशू गौतम को भी सीबीआई हिरासत में भेजा गया।
4 लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप, सीबीआई ने किया खुलासा।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश की अदालत ने रिश्वत के एक मामले में गिरफ्तार डिप्टी कमिश्नर (कॉर्पोरेशन) लेफ्टिनेंट कर्नल अभिषेक कुमार मिश्रा और उनके सह-आरोपी देवांशू गौतम को एक दिन की CBI हिरासत में भेज दिया है।
इस मामले की सुनवाई विशेष CBI न्यायाधीश दिग्विजय सिंह की अदालत में हुई, जहाँ जाँच एजेंसी ने दोनों आरोपियों के लिए दो दिन की हिरासत मांगी थी। हालांकि, अदालत ने केवल एक दिन की हिरासत दी। अदालत ने आदेश दिया कि दोनों आरोपियों को 1 अप्रैल को दोपहर 3:00 बजे फिर से पेश किया जाए, और निर्देश दिया कि इस अवधि के दौरान उनका मेडिकल परीक्षण कराया जाए।
CBI के अनुसार, डिप्टी कमिश्नर लेफ्टिनेंट कर्नल अभिषेक कुमार मिश्रा शाहदरा (उत्तरी) ज़ोन में तैनात हैं। उन पर एक ऐसे कर्मचारी से 4 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है, जिसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही चल रही थी। प्रशासनिक अधिकारी देवांशू गौतम ने कथित तौर पर इस साज़िश में बिचौलिए की भूमिका निभाई थी।
जांच एजेंसी ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद, 27 मार्च को एक जाल बिछाया गया था, और गौतम को राजघाट पार्किंग क्षेत्र में एक कार के अंदर रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया। पैसे मिलने के बाद, आरोपी ने अभिषेक मिश्रा को फोन किया और बाद में नकदी उनके आवास पर पहुँचा दी, जहाँ से बाद में वह राशि बरामद कर ली गई।
CBI का दावा है कि उसके पास इस पूरे मामले से संबंधित बातचीत की रिकॉर्डिंग मौजूद है, जिससे आरोपियों के खिलाफ सबूत काफी मज़बूत हो गए हैं। एजेंसी अब दोनों व्यक्तियों से पूछताछ कर रही है ताकि इस मामले में शामिल अन्य संभावित साजिशकर्ताओं और लाभार्थियों की पहचान की जा सके।
इस बीच, बचाव पक्ष के वकील ने पुलिस हिरासत की याचिका का विरोध किया। हालांकि, अदालत ने उनकी आपत्तियों को खारिज कर दिया और सीमित अवधि के लिए हिरासत दे दी।
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