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'सरकार से सवाल पूछना मानहानि नहीं', प्रवेश वर्मा की याचिका पर कोर्ट का बड़ा आदेश; सौरभ भारद्वाज को राहत

Published: Sat, 10 Oct 2026 08:43 PM (IST)

राउज एवेन्यू कोर्ट ने आप नेता सौरभ भारद्वाज के खिलाफ प्रवेश साहिब सिंह की मानहानि शिकायत खारिज कर दी है। ...और पढ़ें

मानहानि मामले में प्रवेश वर्मा को कोर्ट से झटका। फोटो: आर्काइव

मानहानि मामले में प्रवेश वर्मा को कोर्ट से झटका। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. प्रवेश साहिब सिंह की मानहानि शिकायत खारिज हुई

  2. सौरभ भारद्वाज को कोर्ट से बड़ी राहत मिली

  3. लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना मानहानि नहीं

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राउज एवेन्यू स्थित अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने मंत्री प्रवेश वर्मा की ओर से आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज के खिलाफ दायर मानहानि शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है।

अदालत ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछना मानहानि नहीं है। विपक्ष की जिम्मेदारी है कि वह सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए, उसकी कमियों को सामने लाए और उसकी नीतियों की समीक्षा करे।

 प्रथमदृष्टया मानहानि का मामला नहीं

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नेहा मित्तल की अदालत ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों और पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर सौरभ भारद्वाज के खिलाफ मानहानि का प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता।

अदालत ने यह भी कहा कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों को अपने कामकाज को लेकर आलोचना और सवालों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

ट्रस्ट की संपत्ति और नियुक्ति पर उठाए सवाल

प्रवेश साहिब सिंह ने आरोप लगाया था कि सौरभ भारद्वाज ने मई 2026 में इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और यूट्यूब पर पोस्ट और वीडियो के माध्यम से उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया।

इन पोस्ट में एसएस मोटा सिंह स्कूल के चैरिटेबल ट्रस्ट में अमरजीत सिंह बब्बू की नियुक्ति, ट्रस्ट की 500 करोड़ रुपये की संपत्ति और ट्रस्ट की फाइल सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए थे।

शिकायतकर्ता का आरोप था कि इन बयानों से उनकी छवि खराब हुई और उन्हें राजनीतिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।

सवाल पूछने मात्र से मानहानि नहीं

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि भारद्वाज की पोस्ट में उठाए गए सवालों को पूरे संदर्भ में पढ़ना जरूरी है। अदालत के अनुसार, इन बयानों से मुख्य रूप से सरकार के रवैये और ट्रस्ट की फाइल सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठते हैं।

केवल सवाल पूछने के आधार पर मानहानि का अपराध नहीं बनता।

बब्बू की पोस्ट का भी दिया हवाला

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि सौरभ भारद्वाज ने ट्रस्ट में नियुक्ति को लेकर अमरजीत सिंह बब्बू की ओर से फेसबुक पर किए गए पोस्ट का हवाला दिया था।

इस पोस्ट में बब्बू ने ट्रस्ट का ट्रस्टी बनाए जाने के लिए प्रवेश वर्मा को धन्यवाद दिया था। अदालत के अनुसार, पहले से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सामग्री को दोहराने मात्र से सौरभ भारद्वाज के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने का आधार नहीं बनता।

शिकायतकर्ता के बयान और पोस्ट में विरोधाभास

सुनवाई के दौरान अदालत ने शिकायतकर्ता के उस बयान पर भी गौर किया, जिसमें उन्होंने अमरजीत सिंह बब्बू से किसी तरह का संबंध होने से इनकार किया था। हालांकि, अदालत के सामने पेश शिकायतकर्ता के इंटरनेट मीडिया पोस्ट में बब्बू के साथ उनके परिचय और कॉलेज के दिनों से जानने का उल्लेख मिला।

अदालत ने कहा कि ये तथ्य शिकायतकर्ता के बयान से मेल नहीं खाते और प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि अदालत के सामने पूरा तथ्य नहीं रखा गया।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का महत्व रेखांकित

अदालत ने राजनीतिक व्यक्तियों के बीच सार्वजनिक विमर्श के संदर्भ में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के महत्व को भी रेखांकित किया। आदेश में कहा गया कि जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछना प्रेस और जनता का अधिकार है।

निर्वाचित प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने विचारों से अलग राय और आलोचना को भी सुनें। इस मामले में अदालत ने शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया।

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