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CAG रिपोर्ट में 2026.91 करोड़ के नुकसान का खुलासा, दिल्ली विधानसभा ने आबकारी विभाग से मांगा जवाब

Published: Thu, 02 Apr 2026 10:52 PM (IST)

दिल्ली विधानसभा ने आबकारी विभाग में शराब की बिक्री और विनियमन में हुई भारी गड़बड़ियों पर कड़ा रुख अपनाया है। ...और पढ़ें

CAG की ऑडिट रिपोर्ट पर दिल्ली विधानसभा ने मांगा जवाब। फोटो: आर्काइव

CAG की ऑडिट रिपोर्ट पर दिल्ली विधानसभा ने मांगा जवाब। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. आबकारी विभाग में 2026.91 करोड़ का राजस्व नुकसान उजागर

  2. विधानसभा अध्यक्ष ने 31 जनवरी 2027 तक सुधार का निर्देश दिया

  3. नया ई-आबकारी पोर्टल और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी

राज्य ब्यूरो,  नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा ने शराब की बिक्री और विनियमन (आबकारी विभाग) में हुई भारी गड़बड़ियों पर कड़ा रुख अपनाया है। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने ''लोक लेखा समिति'' (पीएसी) की रिपोर्ट के आधार पर सरकार को इन कमियों को दूर करने के लिए 31 जनवरी, 2027 तक का समय दिया है।

कैग की आडिट रिपोर्ट में पाया गया है कि आबकारी विभाग की लापरवाही और नियमों के उल्लंघन के कारण सरकारी खजाने को लगभग 2,026.91 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ है। रिपोर्ट में विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए गए हैं:-

  • ट्रैकिंग में विफलता : शराब की बिक्री को ट्रैक करने वाली डिजिटल प्रणाली सही ढंग से काम नहीं कर रही थी, जिससे स्टाक और बिक्री का सही डेटा नहीं मिल पाया।
  • लाइसेंसिंग में धांधली : एक ही व्यक्ति या यूनिट को कई लाइसेंस देना और जरूरी कागजात न होने के बावजूद लाइसेंस जारी करना जैसी कमियां पाई गईं।
  • कीमतों में गड़बड़ी : शराब की कीमतों के निर्धारण में स्पष्टता न होने के कारण शराब कारोबारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
  • निगरानी की कमी : विभागों में तालमेल की कमी के कारण शराब की तस्करी बढ़ी और प्रवर्तन एजेंसियाँ इसे रोकने में नाकाम रहीं।

सुधार के लिए उठाए गए कदम

विधानसभा अध्यक्ष ने आबकारी मंत्री और वित्त सचिव को पत्र लिखकर कई सुधार जल्द लागू करने को कहा है:-

  • नया ई-आबकारी पोर्टल : शराब की निगरानी के लिए एक मजबूत ''ट्रैक एंड ट्रेस'' सिस्टम बनाना।
  • जवाबदेही : पिछली गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और व्यक्तियों की पहचान कर उन पर कार्रवाई करना।
  • पारदर्शिता : लाइसेंस प्रक्रिया को सख्त बनाना और हर तीन महीने में इसकी जांच करना।
  • मुनाफे पर नियंत्रण : शराब के दामों और मुनाफे के मार्जिन को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट नियम बनाना।


इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी राजस्व की चोरी रुके और आबकारी विभाग में पारदर्शिता व जवाबदेही बनी रहे। सरकार को 31 दिसंबर, 2026 तक की प्रगति रिपोर्ट अगले साल जनवरी के अंत तक पेश करनी होगी।

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