पंजाब के अतिरिक्त मुख्य सचिव, डीजीपी और जालंधर पुलिस आयुक्त 12 फरवरी तक दें जवाब, विशेषाधिकार समिति का आदेश
दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने पंजाब के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), डीजीपी और जालंधर पुलिस आयुक्त को पंजाब पुलिस ...और पढ़ें
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दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ की गई है एफआईआर। फोटो: आर्काइव

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राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने पंजाब सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को पंजाब पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही के मामले में 12 फरवरी 2026 तक लिखित जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तथा जालंधर के पुलिस आयुक्त से भी लिखित जवाब मांगा गया है।
यह कार्रवाई दिल्ली विधानसभा सचिवालय द्वारा मांगी गई सूचनाओं एवं दस्तावेजों को उपलब्ध न कराए जाने तथा पंजाब पुलिस अधिकारियों के आचरण से संबंधित है। मालूम हो कि विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कल इस पूरे प्रकरण की जांच विशेषाधिकार समिति को सौंप दी थी।
यह कार्रवाई चार फरवरी 2026 को दिल्ली के कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा द्वारा प्रस्तुत शिकायत तथा चार फरवरी 2026 को समिति के समक्ष रखे गए नोट के आधार पर की गई है। पंजाब पुलिस अधिकारियों द्वारा दिए गए उत्तरों एवं दिल्ली विधानसभा सचिवालय को मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध न कराए जाने की समीक्षा के उपरांत, मामले को जांच एवं प्रतिवेदन के लिए विशेषाधिकार समिति को सौंप दिया गया है।
यह प्रकरण छह जनवरी 2026 को दिल्ली विधानसभा के सदन में दिए गए वक्तव्यों के संबंध में पंजाब पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई से जुड़ा है। यह मामला एक निजी व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) तथा पंजाब पुलिस द्वारा विधानसभा की कार्यवाही के एक वीडियो क्लिप के छेड़छाड़ (एडिटेड या डाॅक्टर्ड) किए जाने संबंधी सार्वजनिक बयानों के बाद उत्पन्न हुआ। उल्लेखनीय है कि यह विषय सदन की विशेषाधिकार प्राप्त कार्यवाही से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित है।
पंजाब पुलिस अधिकारियों से प्राप्त उत्तरों एवं सचिवालय के समक्ष रखी गई सामग्री की जांच के पश्चात, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने यह निष्कर्ष निकाला है कि प्रथमदृष्टया विशेषाधिकार उल्लंघन एवं अवमानना का मामला बनता प्रतीत होता है। अतः इस विषय को परीक्षण एवं प्रतिवेदन हेतु दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति को सौंप दिया गया है।
विशेषाधिकार समिति को संबंधित अधिकारियों तथा इस प्रकरण में संलिप्त पाए जाने वाले अन्य व्यक्तियों के आचरण की जांच कर नियमावली के अनुसार सदन के समक्ष अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
