दिल्लीवालों पर भारी नवंबर: बिन बारिश विषैली हवा ने 16 दिन लगातार ‘बहुत खराब’ AQI का बनाया रिकॉर्ड
दिल्ली के निवासियों के लिए पिछला नवंबर बहुत कठिन था। बारिश की कमी और जहरीली हवा के कारण, वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार 16 दिनों तक 'बहुत खराब' रहा, जो एक रिकॉर्ड है।

शुक्रवार को छाए स्माग में ओझल रहा हुंमायू का मकबरा। चंद्र प्रकाश मिश्र
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। नवंबर में पड़े 'सूखे' ने माह की वायु गुणवत्ता को 11 वर्षों में सर्वाधिक प्रदूषित बना दिया है। शनिवार तक माह के 29 दिनों के दौरान हर रोज ही एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 'खराब', 'बहुत खराब' या 'गंभीर' श्रेणी में रहा है। शनिवार को लगातार 16 दिन भी दिल्ली का एक्यूआई 'बहुत खराब' श्रेणी में ही दर्ज किया गया। वर्ष 2015 से लेकर 2025 के दौरान लगातार इतने दिनों तक 'बहुत खराब' श्रेणी बने रहने का भी एक नया रिकार्ड बन गया है। रविवार को 17वें दिन भी यह सिलसिला जारह रहने का पूर्वानुमान है।
इस साल नवंबर में एक भी दिन वर्षा नहीं हुई। दिल्ली वासी पूरे माह ही प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर रहे। 'अच्छी', 'संतोषजनक' और 'मध्यम' श्रेणी के एक्यूआई वाला एक भी दिन नहीं रहा। 'गंभीर' श्रेणी वाले दिन कुछ कम जरूर हो गए, लेकिन 'बहुत खराब' श्रेणी वाले दिन 11 वर्षों में सबसे ज्यादा दर्ज किए गए। अब यह बात अलग है कि माह का औसत एक्यूआई इन 11 सालों का सर्वाधिक नहीं रहा है।
2015 से 2025 में किस साल नवंबर माह में कितने दिन रही किस श्रेणी की हवा
| साल | अच्छा | संतोषजनक | सामान्य | खराब | बहुत खराब | गंभीर |
2025 (29 तारीख तक) | 0 | 0 | 0 | 2 | 24 | 3 |
| 2015 | 0 | 0 | 0 | 3 | 21 | 6 |
| 2024 | 0 | 0 | 0 | 0 | 22 | 8 |
| 2023 | 0 | 0 | 0 | 4 | 17 | 9 |
| 2022 | 0 | 0 | 0 | 12 | 15 | 3 |
| 2021 | 0 | 0 | 0 | 2 | 16 | 12 |
| 2020 | 0 | 0 | 2 | 10 | 9 | 9 |
| 2019 | 0 | 1 | 3 | 8 | 11 | 7 |
| 2018 | 0 | 0 | 1 | 7 | 17 | 5 |
| 2017 | 0 | 0 | 0 | 3 | 20 | 7 |
| 2016 | 0 | 0 | 0 | 3 | 17 | 10 |
2015 से 2025 के दौरान किस साल नवंबर में कितना रहा औसत एक्यूआई
| वर्ष | औसत एक्यूआई |
| 2025 (29 तारीख तक) | 357 |
| 2024 | 374 |
| 2023 | 366 |
| 2022 | 321 |
| 2021 | 380 |
| 2020 | 328 |
| 2019 | 312 |
| 2018 | 335 |
| 2017 | 361 |
| 2016 | 374 |
| 2015 | 358 |
"सर्दियों के दिनों में प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण प्रदूषक तत्व छंट नहीं पाते। यदि मजबूत पश्चिमी विक्षोभों का अभाव हो तो स्थिति और बिगड़ जाती है। इस साल भी कमोबेश वैसा ही देखने को मिला है। पूरे माह वर्षा नहीं हुई। हवा भी ज्यादातर दिन मंद या शांत रही जबकि तापमान में गिरावट का दौर देखा गया। यही वजह रही कि माह में ज्यादातर दिन एक्यूआई 300 से ऊपर ही दर्ज किया गया है।"
-डाॅ. दीपांकर साहा, पूर्व अपर निदेशक, सीपीसीबी
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