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4 साल के बच्चे जितना कद, उम्र 44 साल; 98 cm लंबी महिला की सर्जरी कर AIIMS के डॉक्टरों ने रचा इतिहास

Published: Sat, 17 Oct 2026 12:15 PM (IST)

एम्स के डॉक्टरों ने 98 सेंटीमीटर कद और 22 किलो वजन वाली 44 वर्षीय महिला का गर्भाशय कीहोल सर्जरी से सफलतापूर्वक निकाला। यह जटिल ऑपरेशन 90 मिनट में पूरा हुआ।

एम्स के डॉक्टरों ने महज 90 मिनट में कीहोल सर्जरी से निकाला गर्भाशय। जागरण

एम्स के डॉक्टरों ने महज 90 मिनट में कीहोल सर्जरी से निकाला गर्भाशय। जागरण

HighLights

  1. एम्स में 22 किलो वजन की महिला की कीहोल सर्जरी।

  2. गंभीर ऑस्टियोपोरोसिस के बावजूद गर्भाशय निष्कासन की चुनौती सफल।

  3. 90 मिनट में जटिल ऑपरेशन, महिला को तीसरे दिन मिली छुट्टी।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। महज 98 सेंटीमीटर कद और वजन छह साल के बच्चे के बराबर 22 किलो, एम्स के डॉक्टरों ने 44 वर्षीय इस महिला के गर्भाशय को कीहोल सर्जरी से महज 90 मिनट में निकाल दिया।

महिला की हड्डियां बेहद कमजोर थीं और उसे हाई ब्लड प्रेशर भी था। वह एक साल से मासिक धर्म के दौरान असहनीय दर्द से परेशान थी।

जांच में गर्भाशय के बाहर और उसकी मांसपेशियों की दीवार में गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसी कोशिकाएं बढ़ने की समस्या मिली। तमाम चुनौतियों के बावजूद ऑपरेशन सफल रहा और तीसरे दिन महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

हड्डियां कमजोर और नाजुक

एम्स के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रो. रीता माहे और डॉ. स्वाति तोमर ने सर्जरी का नेतृत्व किया। प्रो. डॉ. रीता माहे के अनुसार, महिला को गंभीर ऑस्टियोपोरोसिस था, जिसमें हड्डियां कमजोर और नाजुक हो जाती हैं।

ऐसे में ऑपरेशन के दौरान शरीर को सही स्थिति में रखना जरूरी था, ताकि हड्डियों पर दबाव न पड़े। सामान्य तरीके से पैर मोड़कर लिटाने पर कमर और जांघ की हड्डियों में फ्रैक्चर का खतरा था। इसलिए विशेष कुशनिंग के साथ महिला को पीठ के बल लिटाकर सर्जरी की गई।

छोटी गर्दन में सांस की नली डालना चुनौतीपूर्ण

एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. पारिन लालवानी, डॉ. चोरो अथिफ्रो कायिना और उनकी टीम ने बेहोशी देने और सांस की नली डालने के दौरान विशेष सावधानी बरती। बताया कि महिला की गर्दन छोटी थी और हड्डियां कमजोर। गर्भाशय बढ़ा हुआ था और आसपास की आंतों से चिपका हुआ था। पेट में कम जगह के कारण भी ऑपरेशन मुश्किल था।

वजन के अनुसार, दवाओं की खुराक तय की गई और खून की व्यवस्था पहले से रखी गई। ऑपरेशन के बाद दर्द कम करने के लिए एपिड्यूरल के बजाय अल्ट्रासाउंड की मदद से पेट में विशेष दवा दी गई।

एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के प्रो. राजेश खडगवत ने भी मरीज की स्थिति के आकलन में महत्वपूर्ण सहयोग किया, जिससे ऑपरेशन सरल हो सका।

एम्स की प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रमुख प्रो. नीना मल्होत्रा ने बताया कि सावधानीपूर्वक योजना और विशेषज्ञों के समन्वय से गंभीर शारीरिक चुनौतियों वाले मरीजों को भी छोटे चीरे वाली सर्जरी का लाभ दिया जा सकता है। इससे दर्द कम होता है और मरीज जल्दी स्वस्थ हो सकता है।

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