नई दिल्ली [वीके शुक्ला]। पिछले चार दिन में पंजाब में जहरीली शराब के सेवन से 115 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन इस घटना से दिल्ली में बैठे आबकारी विभाग के अधिकारियों का पसीना छूट रहा है। कारण साफ है कि दिल्ली में बड़े स्तर पर अवैध शराब का कारोबार होता है। यहां शराब उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब से आती है। आबकारी विभाग छापेमारी कर अवैध शराब को पकड़ रहा है, मगर जिस रफ्तार से अभियान चलना चाहिए, स्टाफ की कमी के चलते नहीं चल पा रहा है।

सूत्रों की मानें तो प्रति वर्ष दिल्ली में शराब की करोड़ों रुपये की तस्करी होती है। इसे रोकने के लिए दिल्ली पुलिस और आबकारी विभाग कार्रवाई करता है। मगर तस्करी पूरी तरह तभी रोकी जा सकती है,जब पड़ोसी राज्यों से जुड़ी दिल्ली की सभी सीमाओं पर पूरी तरह से निगरानी की जा सके।

हकीकत यह है कि जिस निगरानी दस्ता पर तस्करी रोकने की जिम्मेदारी है। उसके पास पर्याप्त स्टाफ तक नहीं है। स्थिति पर गौर करें तो आबकारी विभाग के निगरानी दस्ते में कुल 60 लोगों का स्टाफ है। इसमें एक एसीपी, 9 उपनिरीक्षक, 20 हेड कांस्टेबल और 30 कांस्टेबल हैं, जबकि दिल्ली को कम से कम 500 लोगों का स्टाफ चाहिए। गत फरवरी में आबकारी विभाग की ओर से वित्त विभाग के पास अतिरिक्त स्टाफ जाने के लिए फाइल भेजी गई थी जिसमें वर्तमान से अलग 450 लोगों की भर्ती किए जाने की माग की गई थी। इसमें 75 उपनिरीक्षक 150 हेड कांस्टेबल और 225 कांस्टेबल भर्ती किए जाने का प्रस्ताव था।

वित्त विभाग ने कार्रवाई के लिए फाइल को एडमिनिस्ट्रेशन रिफॉर्म विभाग को भेज दिया था। मगर इस पर अभी तक कार्रवाई नहीं हो सकी है। आबकारी विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि पंजाब की घटना को देखते हुए हम सतर्क हैं। जल्द ही दिल्ली में व्यापक अभियान चलाया जाएगा। मगर यह भी सच्चाई है कि तस्करी रोकने के लिए स्टाफ कम है।

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