दिल्ली में पुरानी ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों की बदलेगी सूरत, DDA तैयार कर रहा रिडेवलपमेंट का प्लान
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने राजधानी की पुरानी ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों के पुनर्विकास के लिए एक मसौदा योजना तैयार की ...और पढ़ें
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द्वारका स्थित एक ग्रुप हाउसिंग सोसायटी। आर्काइव
HighLights
डीडीए ने पुरानी ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों के पुनर्विकास का मसौदा तैयार किया।
योजना में 50% तक अतिरिक्त एफएआर का प्रोत्साहन मिलेगा।
सुरक्षा, आधुनिक सुविधाएं और बेहतर पार्किंग सुनिश्चित की जाएगी।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में दशकों पहले बनी ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों की सूरत बदलने वाली है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने इन पुरानी सोसायटियों के पुनर्विकास के लिए व्यापक एक्शन प्लान का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य जर्जर हो चुकी इमारतों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना और बढ़ते परिवारों की जरूरतों को पूरा करना है।
क्यों महसूस हुई पुनर्विकास की जरूरत?
दिल्ली की अधिकांश ग्रुप हाउसिंग सोसायटियां 30-40 साल पुराने नियमों के आधार पर बनाई गई थीं। समय के साथ परिवारों का आकार बढ़ा है, जिससे लोगों को अब बड़े रिहायशी क्षेत्र की जरूरत महसूस हो रही है। वर्तमान में इन सोसायटियों को बहुत सी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है:-
- सुरक्षा का अभाव : कई सोसायटियों में अतिक्रमण के कारण फायर सेफ्टी के नियमों का पालन करना नामुमकिन हो गया है।
- लिफ्ट की समस्या : पुरानी इमारतों में लिफ्ट की सुविधा नहीं है, जिससे बुजुर्गों और बीमारों को काफी परेशानी होती है।
- स्ट्रक्चर के साथ छेड़छाड़ : जगह की कमी के कारण निवासियों ने मुख्य बिल्डिंग स्ट्रक्चर में बदलाव कर लिए हैं, जिससे इमारतों की मजबूती पर खतरा मंडरा रहा है।
- कॉमन एरिया की कमी : सोसायटियों में पार्कों और कम्युनिटी स्पेस का अभाव है।
डीडीए के ड्राफ्ट की मुख्य बातें : इंसेंटिव और एफएआर
- डीडीए ने पुनर्विकास को प्रोत्साहित करने के लिए ''इंसेंटिव आधारित माडल'' का प्रस्ताव रखा है।
- अधिकतम एफएआर : पुनर्विकास करने वाले निजी प्लाटों को इंसेंटिव के रूप में 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त एफएआर दी जा सकती है, जो अधिकतम 400 तक हो सकती है।
- सर्विस लेन का उपयोग : जो प्लाट सर्विस लेन के साथ हैं, उनके लेन एरिया को स्कीम में शामिल किया जा सकेगा। हालांकि इस अतिरिक्त क्षेत्र पर कोई एफएआर नहीं मिलेगा और इसे सार्वजनिक उपयोग के लिए ही रखा जाएगा।
- नियमों में ढील : ड्राफ्ट के अनुसार, हाउसिंग डेंसिटी, सड़कों की न्यूनतम चौड़ाई और सामुदायिक सुविधाओं के मानकों में कुछ राहत दी जा सकती है।
आधुनिक बुनियादी ढांचा और सुरक्षा
पुनर्विकास के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि मौजूदा सार्वजनिक सुविधाएं प्रभावित न हों। अस्पताल, डिस्पेंसरी, स्कूल, कालेज और पुलिस स्टेशन जैसी सुविधाओं को या तो उनकी पुरानी जगह पर रखा जाएगा या पुनर्विकास स्कीम के भीतर ही उनके लिए वैकल्पिक जगह आवंटित की जाएगी।
ट्रैफिक और पार्किंग के लिए खास इंतजाम
- कमर्शियल उपयोग : स्कीम के तहत पार्किंग और सेवाओं के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त एफएआर मान्य होगा, जिसका इस्तेमाल कमर्शियल गतिविधियों के लिए किया जा सकेगा।
- सर्कुलेशन पैटर्न : पैदल चलने वालों और वाहनों के लिए अलग-अलग रास्ते होंगे।
- इमरजेंसी एक्सेस : पूरी सोसाइटी की एंट्री कंट्रोल होगी, लेकिन आपातकालीन वाहनों (जैसे एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड) के लिए हर ब्लाक में सीधी पहुंच सुनिश्चित की जाएगी।
वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि डीडीए का यह कदम न केवल दिल्ली के स्काईलाइन को बदलेगा, बल्कि लोगों को एक सुरक्षित और आधुनिक जीवनशैली प्रदान करेगा। इस ड्राफ्ट को अंतिम रूप मिलने के बाद, पुरानी सोसायटियों के निवासियों के पास अपनी पुरानी इमारतों को आलीशान फ्लैटों में बदलने का कानूनी रास्ता साफ हो जाएगा।
