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दो दिन चला बुलडोजर, एक सप्ताह में फिर कब्जा... रानी गार्डन में डीडीए की कार्रवाई पर सवाल

Published: Mon, 17 Aug 2026 06:58 AM (IST)

डीडीए की रानी गार्डन में अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई हवाहवाई साबित हुई, एक सप्ताह के भीतर ही सरकारी जमीन पर अवैध ...और पढ़ें

डीडीए की रानी गार्डन में अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई हवाहवाई साबित हुई

डीडीए की रानी गार्डन में अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई हवाहवाई साबित हुई

HighLights

  1. डीडीए की रानी गार्डन में अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई निष्प्रभावी साबित हुई।

  2. एक सप्ताह में सरकारी जमीन पर अवैध पार्किंग, झुग्गियां फिर से बसीं।

  3. स्थानीय लोगों ने डीडीए की गंभीरता और कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल।

जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। रानी गार्डन में डीडीए की कार्रवाई हवाहवाई साबित हुई। कार्रवाई के एक सप्ताह में फिर से डीडीए की जमीन पर अवैध पार्किंग, नर्सरी व झुग्गियां बस गईं। जो अतिक्रमण डीडीए ने दो दिन लगातार अभियान चलाकर हटाया था, वह फिर से हो गया है। स्थानीय लोगों ने डीडीए पर सवाल उठाए कि अधिकारी चाहते ही नहीं है अतिक्रमण जड़ से हटे। दोबारा से अतिक्रमण न हो डीडीए ने इसकी व्यवस्था ही नहीं की है।

डीडीए ने छह व सात अगस्त को रानी गार्डन में कार्रवाई करके बुलडोजर से 50 से अधिक झुग्गियां हटाई थीं। इसके साथ ही नर्सरी की जगह बुलडोजर से खोदी गई थी। अवैध पार्किंग भी हटाई थी। दो दिन तक चली इस कार्रवाई में तीन बीघा जमीन को खाली करवाया गया था। कार्रवाई को एक सप्ताह भी नहीं हुआ था।

अतिक्रमण करने वालों ने फिर से सरकारी जमीन को घेर लिया। मौजूदा समय में यहां की स्थिति देखने पर लग नहीं रहा है कि यहां कोई कार्रवाई हुई भी है या नहीं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अतिक्रमण करने वालों पर डीडीए सख्त कार्रवाई नहीं कर रहा है, इस वजह से वह दुस्साहस दिखाते हुए अतिक्रमण कर रहे हैं।

सरकारी जमीन पर कार्रवाई के बाद अतिक्रमण होना यह दर्शाता है कि विभाग अपनी जमीन को लेकर जरा गंभीर नहीं है। वहीं इस मामले में डीडीए का कहना है कि अतिक्रमण करने वालों पर फिर से कार्रवाई की जाएगी।

दो दिनों तक डीडीए ने कार्रवाई कर अतिक्रमण हटाया, लेकिन उसका कार्रवाई का कोई असर यहां नहीं दिखा। झुग्गियां बनाकर लोग रह रहे हैं। अवैध पार्किंग चल रही है।
-राजीव कुमार, स्थानीय निवासी।

डीडीए को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जहां पर कार्रवाई करे उसके बाद वहां कोई अतिक्रमण न कर सके। अधिकारी कार्रवाई के बाद जमीन पर उतरकर हकीकत नहीं जानते हैं।
-इंद्रजीत शर्मा, स्थानीय निवासी।