JNU की छात्राओं के आरोपों पर महिला आयोग सख्त, कुलपति को नोटिस; तीन दिन में कार्रवाई की मांगी रिपोर्ट
दिल्ली महिला आयोग ने जेएनयू की छात्राओं द्वारा प्रोफेसर पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों का स्वत: संज्ञान लिया ...और पढ़ें

जेएनयू में छात्राओं की ओ से लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर दिल्ली महिला आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया है।
HighLights
दिल्ली महिला आयोग ने जेएनयू यौन उत्पीड़न मामले का संज्ञान लिया।
कुलपति को नोटिस जारी कर तीन दिन में रिपोर्ट मांगी।
छात्राओं ने मई में शिकायत की थी, कार्रवाई न होने का आरोप।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की छात्राओं द्वारा एक प्रोफेसर पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के मामले में दिल्ली महिला आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग की अध्यक्ष लता गुप्ता के निर्देश पर जेएनयू के कुलपति को नोटिस जारी कर मामले में अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट तीन दिन के भीतर मांगी गई है।
जेएनयू के कुलपति से की थी शिकायत
आयोग ने सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो का संज्ञान लेते हुए यह कदम उठाया है। वीडियो में कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया है कि उन्होंने संबंधित प्रोफेसर के खिलाफ मई 2026 में जेएनयू के कुलपति के समक्ष शिकायत की थी, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। छात्राओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर संबंधित प्रोफेसर को बचाने का प्रयास करने का भी आरोप लगाया है।
शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई की गई?
दिल्ली महिला आयोग ने जेएनयू प्रशासन से पूछा है कि मई में छात्राओं द्वारा दी गई शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई की गई। आयोग ने यह भी जानकारी मांगी है कि क्या शिकायत कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम के तहत गठित आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के समक्ष भेजी गई थी।
कार्रवाई की एटीआर भी तलब की
यदि शिकायत आईसीसी को भेजी गई थी तो समिति द्वारा अब तक की गई कार्रवाई और जांच की वर्तमान स्थिति की जानकारी देने को कहा गया है। आयोग ने मामले में की गई कार्रवाई और आगे की प्रस्तावित कार्रवाई से संबंधित कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) भी मांगी है। वहीं, यदि शिकायत पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है तो इसका कारण स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है।
तीन दिन में आयोग को भेजेंगे जवाब
आयोग ने जेएनयू प्रशासन को निर्देश दिया है कि पूरे मामले की कार्रवाई रिपोर्ट तीन दिनों के भीतर आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जाए। आयोग ने स्पष्ट किया कि इंटरनेट मीडिया पर लगाए गए आरोपों को प्रथम दृष्टया सत्य मानकर निष्कर्ष नहीं निकाला जा रहा है, बल्कि संबंधित प्राधिकारी से तथ्यात्मक रिपोर्ट लेकर मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
'छात्राओं की सुरक्षा से समझौता नहीं'
आयोग की अध्यक्ष लता गुप्ता ने कहा कि किसी भी छात्रा या महिला द्वारा यौन उत्पीड़न की शिकायत किए जाने के बाद उसकी निष्पक्ष, समयबद्ध और संवेदनशील तरीके से जांच जरूरी है। किसी भी शिक्षण संस्थान में महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
