राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली :

मूल साहित्य चाहे किसी भी भाषा में हो, उसका अनुवाद भी उतना ही अहम होता है। अनुवाद के बाद उस कृति की पहुंच बडे़ स्तर तक चली जाती है। बावजूद इसके अनुवादक पर्दे के पीछे ही रखे जाते रहे हैं। लेकिन दैनिक जागरण ने ¨हदी बेस्टसेलर की सूची में अनुवाद की भी श्रेणी को शामिल करते हुए ऐतिहासिक कदम उठाया है। यह वाकई सराहनीय है।

यह निष्कर्ष सामने आया शुक्रवार शाम कनॉट प्लेस स्थित ऑक्सफोर्ड बुक स्टोर में दैनिक जागरण द्वारा आयोजित संगोष्ठी में। संगोष्ठी का विषय था '¨हदी अनुवाद और बेस्टसेलर' और इसके वक्ताओं में शामिल थीं यात्रा बुक्स की प्रबंध निदेशक नीता गुप्ता, दिल्ली विश्वविद्यालय में प्राध्यापक और अनुवादक मनीषा तनेजा और राजकमल प्रकाशन में सह संपादक तथा अनुवादक उर्मिला गुप्ता। संचालक का जिम्मा दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राध्यापक प्रभात रंजन ने संभाला।

दैनिक जागरण ¨हदी बेस्टसेलर की दूसरी सूची में अनुवाद की श्रेणी में अनूदित पुस्तक 'सीता : मिथिला की योद्धा' के लिए प्रथम स्थान पाने वाली उर्मिला गुप्ता का कहना था कि अनुवाद का बाजार बहुत बड़ा है, इसीलिए प्रकाशक कराते भी हैं। लेकिन तब भी अनुवादकों को हमेशा पर्दे के पीछे ही रखा जाता है। ऐसे में दैनिक जागरण की पहल वाकई मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने यह भी कहा कि अनुवाद के दौरान चरित्रों को आज की पीढ़ी के अनुरूप नए रूप में सामने लाने की छूट भी स्वीकार्य होनी चाहिए।

मीनाक्षी तनेजा का कहना था कि अनुवाद हमेशा से बिकते रहे हैं। लेकिन बेस्टसेलर की सूची में कभी शामिल नहीं रहे। दैनिक जागरण ने अनुवाद को भी इसमें शामिल करके अनुवादकों के साथ बहुत बड़ा न्याय किया है। उन्होंने यह भी कहा कि बहुत सी पुस्तकों का अनुवाद इस कारण भी नहीं हो पाता क्योंकि उनके कॉपी राइट को लेकर अड़चनें सामने आ जाती हैं।

नीता गुप्ता ने कहा कि अनुवाद से मूल पुस्तक और उसके लेखक की पहचान भी बड़ी होती जाती है। अनुवाद के जरिये अंतिम पाठक तक पहुंचना संभव हो पाता है। उन्होंने यह भी बताया कि दैनिक जागरण ने ¨हदी बेस्टसेलर की सूची जारी की तो उनके पास लंदन से उनके एक मित्र का फोन आया और सूची की सभी पुस्तकें भेजने को कहा। नीता ने बताया कि वह बेस्टसेलर सूची की पुस्तकों को मेट्रो में सफर के दौरान पढ़ते हैं और कहते हैं कि दैनिक जागरण की सूची में शामिल पुस्तकें पढ़ना गर्व की बात है।

प्रभात रंजन ने कहा कि पूर्व के दशकों में भारतीय भाषाओं की पुस्तकों से ही अनुवाद ज्यादा होता था, लेकिन अब अंग्रेजी पुस्तकों से अधिक होता है। हालांकि बहुत बार अनुवादक को अनुवाद के लिए मन मुताबिक पुस्तक नहीं मिलती। प्रभात सहित अन्य सभी वक्ताओं का यह भी कहना था कि दैनिक जागरण की ¨हदी बेस्टसेलर सूची को स्वीकार करने में शुरुआत में कुछ हिचक रहे थे, लेकिन धीरे-धीरे न सिर्फ इसे स्वीकार कर रहे हैं बल्कि प्रकाशकों का नजरिया भी बदल रहा है।

दैनिक जागरण बेस्टसेलर

दैनिक जागरण ने हिंदी में पहली बार प्रामाणिक और पारदर्शी तरीके से हिंदी बेस्टसेलर की सूची तैयार करवाई है। इसे विश्व प्रसिद्ध एजेंसी नीलसन-बुकस्कैन ने तैयार की है। सूची को तीन श्रेणियों में बाटा गया है -कथा, कथेतर और अनुवाद। दैनिक जागरण हिंदी बेस्टसेलर की सूची हर तीन महीने पर जारी की जाती है। अब तक दैनिक जागरण हिंदी बेस्टसेलर की दो सूची जारी हो चुकी है।

Posted By: Jagran